प्रश्न 1.
माल एवं सेवाकर का संक्षिप्त परिचय दीजिये। इसकी विशेषताओं को भी समझाइये।
उत्तर:
“एक देश एक टैक्स, एक बाजार”
“Our aim in economical and educational Impowerment of the poor, GST can help as to achieve this aim” – “Narendra Modi”
GST = Goods and Service Tax
जिसे राजकीय तौर पर The Constitution GST Bill 2014 कहा जाता है। यह एक अप्रत्यक्ष कर है जो व्यापक पैमाने पर पूरे देश के निर्माता, व्यापारी वस्तुओं और सेवाओं के उपभोक्ताओं पर लगेगा। यह टैक्स अन्य सभी Taxes को हटा देगा जो कि केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा लगाये जाते हैं। GST बिल लोकसभा में 6 मई, 2015 को तथा राज्य सभा में 3 अगस्त, 2016 को पास हुआ। केन्द्र सरकार जी एस टी बिल को 1 जुलाई 2017 – 18 से लागू करना चाहती है परन्तु इसे लागू करने से पहले संविधान में संशोधन होगा जिसके लिये 50% विधान मण्डलों की स्वीकृति आवश्यक है। केन्द्र सरकार GST के लिये दर का निर्धारण नहीं कर सकती।
GST बिल से पिछड़े राज्यों का विकास संभव है’ भारत में कई सामानों की कीमत विभिन्न राज्यों में अलग – अलग होती है परन्तु जी एस बिल लागू होने के बाद ऐसा नहीं होगा प्रत्येक उत्पाद पर लगने वाले Tax में केन्द्र और राज्य को बराबर – बराबर मिलेगा। स्पष्ट है कि राष्ट्र में वस्तु की कीमत एक जैसी करने के लिये जी एस टी आवश्यक है।
निष्कर्ष के रूप में जी एस टी भारत की अर्थव्यवस्था, व्यापार व विभिन्न व्यक्तियों पर काफी हद तक सकारात्मक प्रभाव होगा यह आम आदमी के लिये काफी फायदे भी देगा क्योंकि आम आदमी को सस्ती वस्तु को प्राप्त करने के लिये दूसरे राज्यों में जाने की आवश्यकता नहीं होगी क्योंकि पूरे देश में वस्तु की कीमत समान होगी – इसीलिये यह बात GST से चरितार्थ होती है –
“एक देश, एक टैक्स, एक बाजार”, यह केन्द्र सरकार का एक सराहनीय कदम है।
जी एस टी की विशेषताएँ – जी एस टी की प्रमुख विशेषताएँ निम्न प्रकार हैं –
(1) यह बिक्री के स्थान के आधार पर लगने वाला कर है अर्थात एक राज्य के अन्दर या एक राज्य से दूसरे राज्य में बिक्री कर कने पर यदि एक राज्य के अन्दर बिक्री की जाती है तो GST लगेगा जिस पर केन्द्र और राज्य दोनों की हिस्सेदारी होगी। यदि एक राज्य से दूसरे राज्य में बिक्री होती है तो, IGST लगेगा।
(2) यह बिक्री के प्रत्येक स्तर पर लगेगा GST के अन्तर्गत माल जितनी बार बेचा जायेगा जी एस टी उतनी ही बार निर्धारित दर वे स्थान के आधार पर वसूल किया जायेगा परन्तु पूर्व में चुकाये गये क्रय के आधार पर जी एस टी का समायोजन किया जायेगा।
(3) सभी कर योग्य माल एवं सेवाएँ जो किसी प्रतिफल के लिये होती हैं उन पर यह लागू होगा। निम्न पर जी एस टी नहीं लगेगा
- कर मुक्त माल एवं सेवायें सी जी एस टी एवं एस जी एस टी के लिये एक समान सूची जारी होगी।
- माल एवं सेवायें जो जी एस टी की परिधि के बाहर होंगी।
- एक निर्धारित सीमा से कम लेनदेन ।
(4) दोहरा जी एस टी देश में लागू किया जावेगा – दोहरे जी एस टी का अर्थ है केन्द्र और राज्य सरकारों द्वारा वसूल किया जाने वाला जी एस टी, सेन्ट्रल जी एस टी केन्द्र द्वारा वसूल किया जायेगा (CGST), राज्य सी एस टी राज्य सरकारों द्वारा वसूला जायेगा (SGST).
(5) राज्य के भीतर होने वाली बिक्री या राज्य में प्रदान की जाने वाली सेवा पर SGST और CGST दोनों वसूल किये जायेंगे।
(6) अन्तर्राज्यीय बिक्री के मामले में IGST वसूल किया जायेगा जो कि केन्द्र सरकार द्वारा वसूला जायेगा।
(7) आई जी एस टी राज्य के बाहर से माल आयात करने पर लगेगा तथा माल या सेवाओं के अन्तर्राज्यीय स्टाक हस्तान्तरण पर भी वसूल किया जायेगा।
(8) देश के बाहर होने वाले निर्यात शून्य दर से कर योग्य होंगे। ऐसा होने से माल की खरीद पर इनपुट कर जमा का पुनर्भुगतान प्रतिदाय प्राप्त करने का अधिकार होगा।
(9) पूर्व में जो राज्य माल का निर्माता था उसे 10 प्रतिशत अतिरिक्त जी एस टी वसूल करने का अधिकार था परन्तु अब इसे वसूल नहीं करने का निर्णय किया गया है।
(10) निम्न को छोड़कर सभी माल एवं सेवाएँ जी एस टी के दायरे में आने की संभावना है।
- शराब – इस पर राजकीय उत्पाद शुल्क एवं वैट देय होगा।
- बिजली – इस पर बिजली शुल्क देय होगा।
- रियल एस्टेट इस पर प्रोपर्टी कर एवं स्टाम्प डयूटी देय होगा।
- पैट्रोलियम उत्पाद।
- तम्बाकू उत्पाद, सेन्ट्रल उत्पाद शुल्क विभाग के अधीन होंगे।
(11) निम्नलिखित कर जी एस टी में शामिल किये जायेंगे अर्थात जी एस टी वसूल करने के बाद में Tax समाप्त हो जायेगा एवं वसूल नहीं होंगे
केन्द्रीय कर –
- केन्द्रीय उत्पाद शुल्क
- अतिरिक्त उत्पाद शुल्क
- उत्पाद शुल्क जो मेडीसिन एवं टायलेटरीज प्रिप्रेरेशन कानून के तहत वसूल सीमा शुल्क।
- अतिरिक्त सीमा शुल्क
- सेवा कर
- सरचार्ज एवं सैस राज्य कर
- स्टेट वैट विक्रय कर
- केन्द्रीय विक्रय कर
- क्रय कर
- मनोरंजन कर
- विलासिता कर
- एन्ट्री कर
- लाटरी, शर्त एवं जुए पर लगने वाला कर सरचार्ज एवं सैस।
(12) जी एस टी की चार दरें निर्धारित होंगी –
- आवश्यक वस्तुओं एवं सेवाओं की दर
- सामान्य वस्तुओं एवं सेवाओं की प्रभापित दर
- कीमती धातुओं की विशेष दर
- शून्य दर।
(13) न्यूनतम कर योग्य राशि सी जी एस टी तथा एस जी एस टी दोनों पर लागू होगी, इसे 20 लाख रखा गया है अर्थात 20 लाख तक की बिक्री करने वाले व्यवहारी जी एस टी के दायरे में नहीं आयेंगे।
(14) कम्पोजीशन स्कीम उन व्यवहारियों के लिए होगी जिनकी एक सीमा तक कर योग्य विक्रय है. इसे 50 लाख रखे जाने का विचार है यानि ऐसे व्यवहारी एक मुश्त राशि जमा करा सकते हैं।
(15) वस्तुओं के वर्गीकरण के लिए एस एस एवं कोड इस्तेमाल किया जायेगा।
(16) सेवाओं के लिये वर्तमान कोडिंग सिस्टम उपयोग में लिया जायेगा।
(17) पूरे देश में उत्पाद या वस्तु की कीमत एक समान होगी।
(18) गरीब वर्ग, आम आदमी को फायदा होगा
(19) टैक्स प्रणाली में सुधार होगा।
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