प्रश्न 2.
बीमा के क्षेत्र की विस्तृत विवेचना कीजिए।
उत्तर:
भारत में बीमा का प्रारम्भ 13 वीं शताब्दी में हुआ ऐसा माना जाता है। इसकी उत्पत्ति सामुद्रिक बीमे से हुई ऐसा वर्णन मिलता है। धीरे – धीरे अग्नि बीमा, जीवन बीमा, चोरी का बीमा और अन्य गैर परम्परागत आधुनिक बीमों का प्रचलन हुआ। वर्तमान में जोखिम की विविधताओं के कारण बीमाकर्ताओं द्वारा अलग – अलग प्रकार के बीमे किये जाते हैं। वर्तमान युग में बीमे का क्षेत्र बहुत व्यापक है।
बीमा का वर्गीकरण निम्न आधारों पर किया जा सकता है –
- बीमा की प्रकृति के आधार पर
- व्यावसायिक आधार पर
- जोखिम के आधार पर वर्गीकरण।
बीमा को प्रकृति के आधार पर निम्न प्रकार बाँटा जाता है –
- जीवन बीमा
- अग्नि बीमा
- सामुद्रिक बीमा
- सामाजिक बीमा
- अन्य बीमा।
1. जीवन बीमा – इसके अन्तर्गत जीवन का बीमा किया जाता है। इसमें ‘मानव जीवन’ बीमा की विषय वस्तु होती है। इस प्रकार के बीमा में बीमाकर्ता एक निश्चित प्रतिफल (प्रीमियम) के बदले बीमित को उसकी मृत्यु पर उसके उत्तराधिकारी को अथवा बीमा अवधि पूर्ण होने पर स्वयं बीमित को एक निश्चित धनराशि चुकाने का बचन देता है। बीमित को एक निश्चित अवधि तक प्रीमियम चुकानी पड़ती है। यदि बीमा अवधि पूर्व ही बीमित का देहान्त हो जाता है तो बीमा राशि बीमाकर्ता द्वारा बीमित के उत्तराधिकारी को भुगतान की जावेगी, यदि बीमित बीमा अवधि तक जीवित रहता है तो बीमा धन की राशि मय बोनस बीमित को चुकायी जायेगी। जीवन बीमा बीमित को एवं मृत्यु पर उसके परिवार के अन्य सदस्यों को सुरक्षा प्रदान करता है। “जीवन बीमा में सुरक्षा के साथ – साथ विनियोग तत्व भी होता है। जीवन बीमा व्यवसाय देश में भारतीय जीवन बीमा निगम” व अन्य कुछ निजी कम्पिनियाँ, जैसे – कोटक महेन्द्रा, बजाज आलियांज, आई सी आई पूडेन्शियल द्वारा भी किया जाता है।
2. अग्नि बीमा – वह बीमा जिसमें बीमा कर्ता, बीमित को आग लगने से सम्पत्ति को होने वाली हानि की क्षति की पूर्ति का वचन देना है अग्नि बीमा कहलाता है। यह क्षतिपूर्ति का बीमा है जिसमें वास्तविक हानि की क्षतिपूर्ति की जाती है। वह बीमा सामान्यतः एक वर्ष के लिए किया जाता है इस बीमे में आग से होने वाले नुकसान के अतिरिक्त कुछ निश्चित परिणामजन्य हानियों की क्षतिपूर्ति के लिए भी किया जाता है, जैसे – बीमा दंगों, बलवों, उपद्रवों, गैस विस्फोट, भूकम्प, आँधी तूफान, बाढ़, बिजली गिरना, वायुयान क्षति, जलप्लावन आदि जाखिमों से सम्पत्ति की सुरक्षा के लिए भी कराया जा सकता है। वर्तमान युग में इस बीमे को महत्व बहुत अधिक है। बड़े – बड़े कारखाने, गोदाम, दुकान, आवासीय बस्तियों में होने के कारण आग का खतरा बना रहता है। अत्यधिक विद्युत उपयोग होने से विद्युत सर्किट बाधा होने के कारण भी अग्नि से हानि की जोखिमें बनी रहती हैं।
3. सामुद्रिक बीमा – समुद्री रास्ते से विदेशों तक व्यापार किया जाता है। इसमें समुद्रिक जोखिमें, जहाज व माल के सम्बन्ध में होने वाली क्षतियों का बीमा कराया जाता है। समुद्री तूफान, जहाज के दूसरे जहाज से या चट्टान से टकरा जाने से होने वाली हानि की क्षतिपूर्ति के लिए यह बीमा कराया जाता है।
समुद्री बीमा भी दो प्रकार का होता है –
- महासागर सामुद्रिक बीमा
- अन्तर्राष्ट्रीय अथवा देशीय सामुद्रिक बीमा।
4. सामाजिक बीमा – सरकार ने गरीब, असहाय, बेसहारा वर्ग को आर्थिक सहायता व सुरक्षा प्रदान करने के लिए सामाजिक बीमा योजनाओं का विकास किया है। इस बीमा के अन्तर्गत विभिन्न प्रकार के बीमे जैसे – बेरोजगारी, बीमारी, आकस्मिक दुर्घटनाओं, वृद्धावस्था, प्रसूति मृत्यु आदि जोखिमों का बीमा किया जाता है।
राष्ट्रीय श्रम आयोग ने सामाजिक बीमा को परिभाषित करते हुए लिखा है कि ”सामाजिक बीमा वह योजना है जो अल्प आय वर्ग के लोगों को अधिकारपूर्वक वह राशि जमा के रूप में प्रदान करती है जो बीमित सेवायोजना तथा सरकार के अंशदान से एकत्रित होती है।”
सामाजिक बीमा मुख्यत:
निम्न प्रकार का होता है –
(अ) बीमारी बीमा – इस बीमा में बीमित के बीमार पड़ जाने पर दवाइयों, चिकित्सा सुविधा तथा बीमारी की अवधि में वेतन की क्षतिपूर्ति की व्यवस्था की जाती है। सामान्य बीमा निगम द्वारा इस हेतु मेडीक्लेम विभिन्न योजनाएँ चलायी गयी हैं।
(ब) मृत्यु बीमा – यदि बीमित की कार्य के दौरान मौत हो जाए तो उसके आश्रितों को पूर्णतः अथवा आंशिक रूप से एक धनराशि प्रदान की जाती है। नियोक्ता अपने कर्मचारियों का मृत्यु बीमा करवा कर अपने दायित्व की हस्तान्तरण बीमाकर्ता को कर देता है।
(स) असमर्थता बीमा – कारखाने, फैक्ट्री में कार्य करने में दुर्घटना से किसी कर्मचारी के पूर्णत: अथवा आंशिक रूप से अपंग हो जाने पर क्षतिपूर्ति का प्रावधान है। यद्यपि श्रमिक क्षतिपूर्ति अधिनियम के अनुसार, यह दायित्व सेवायोजकों का होता है परन्तु नियोक्ता इस प्रकार का बीमा करवा कर दायित्व का हस्तान्तरण बीमा कम्पनी को कर सकता है।
(द) बेरोजगारी बीमा – जब कुछ विशिष्ट कारणों से बीमित बेरोजगार हो जाते हैं तो उनको पुनः रोजगार दिलाने तब की अवधि के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है।
(य) वृद्धावस्था बीमा – इस बीमा द्वारा वृद्धावस्था में सहायता पहुँचायी जाती है। इस प्रकार के बीमों में बीमाकर्ता द्वारा बीमित को या उसके अश्रित को एक निश्चित आयु के बाद नियमित वित्तीय सहायता पहुँचायी जाती है।
सरकार द्वारा गरीबों, असहायों, कुलियों, कामगारों, श्रमिकों, हस्तशिल्पियों, कारीगरों एवं समाज के कमजोर वर्ग के लिए विभिन्न प्रकार की बीमा योजनाएँ नाममात्र के प्रीमियम पर चलायी जा रही हैं। इन्हें जनकल्याणकारी योजनाओं का नाम दिया जाता है। कुछ योजनाएँ तो सरकार की ऐसी हैं जिनमें कोई प्रीमियम नहीं देना पड़ता और दुर्घटना होने पर लाभ की व्यवस्था की जाती है।
5. अन्य बीमे – वर्तमान युग में तकनीकी विकास, औद्यौगिकीकरण एवं शहरीकरण व अन्य कारणों से जोखिमों के क्षेत्र में बहुत वृद्धि हुई है। हमारे जीवन में जोखिमों के विस्तार के कारण बीमाकर्ता द्वारा वर्तमान में आवश्यकता आधारित विभिन्न बीमा योजनाओं का चयन शुरू हुआ है जो निम्न प्रकार है –
(अ) वाहन बीमा – सड़क यातायात में अनेक प्रकार के संचालित वाहन, बस, कार, जीप, मोटर – साइकिल (दुपहिया/चौपहिया वाहनों का बीमा कराना अनिवार्य है, ऐसे बीमाओं में दुर्घटना से वाहन एवं तृतीय पक्षकार को होने वाली हानि की क्षतिपूर्ति बीमाकर्ता द्वारा की जाती है। वाहन बीमा एक वर्ष के लिए मान्य होता है। इस वाहन बीमा में तीन जोखिमों का उत्तरदायित्व बीमाकर्ता द्वारा वाहन किया जाता है। जिसमें वाहन की क्षति, वाहन स्वामी की क्षति एवं वाहन से तीसरे पक्षकार को पहुँची क्षति शामिल है।
(ब) व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा – इस बीमे की दशा में दुर्घटना, जैसे – मृत्यु, स्थायी या आंशिक रूप से असमर्थ होने की स्थिति में बीमित को होने वाली सम्भावित हानि की पूर्ति का उत्तरदायित्व बीमाकर्ता द्वारा ग्रहण किया जाता है। दुर्घटना में मृत्यु होने पर, पूर्ण अयोग्यता होने पर बीमा की सम्पूर्ण राशि की क्षतिपूर्ति की जाती है जबकि आंशिक अयोग्यता की दशा में बीमापत्रों की शर्तों के अनुसार एक निश्चित अनुपात में क्षतिपूर्ति की जाती है। साधारण बीमा निगम की चार सहायक कम्पनियाँ व्यक्तिगत दुर्घटना बीमापेत्र का निर्गमन करती हैं। यह वायुयात्रा एवं रोडवेज यात्रा के अन्तर्गत भी प्रचलित है।
(स) चोरी – डकैती बीमा – इस प्रकार के बीमों में बीमाकर्ता बीमित को चोरी, सेंधमारी, उठाईगीरी आदि से होने वाली हानि की क्षतिपूर्ति का वचन देता है। बीमित अपने मकान, दुकान, माल – गोदाम, यात्रा के दौरान ले जाये जा रहे समान, लाये एवं ले जाये जाने वाले धन आदि का बीमा करवाता है। यह सिनेमागृहों, पेट्रोल पम्पों, आवासीय होटलों, बैंक, वित्तीय संस्थाओं आदि के लिए उपयोगी होता है।
(द) पशुधन बीमा – इस प्रकार के बीमा में यदि पशुओं में महामारी या बीमारी के कारण या अन्य किसी कारण से पशुओं की हानि होती है तो बीमाकर्ता बीमित को क्षतिपूर्ति कर देता है। इसमें गाय, बैल, भैंस, गधे, घोड़े, ऊँट, भेड़, बकरी आदि का बीमा सम्मिलित है।
(य) फसल बीमा – कृषि की जोखिमों के कारण कुछ वर्षों से यह बीमा काफी प्रचलित है। उसमें जलवायु सम्बन्धी कारणों, यथा – सूखा, बाढ़, आंधी, तूफान, पौधों की बीमारी से महामारी के प्रकोप से होने वाली क्षति की बीमित को क्षतिपूर्ति की जाती है।
(र) अपराध बीमा – इसमें डकैती, लूटपाट, उपद्रवों, आतंकी कार्यवाहियों आदि से सुरक्षा प्राप्त की जा सकती है। बैंक, वित्तीय संस्थाएँ, यातायात संस्था, होटल, पेट्रोल पम्प तथा अन्य व्यावसायिक संस्थान इस बीमे के द्वारा सुरक्षित हो सकते हैं।
(ल) अन्य बीमे – उपरोक्त के अतिरिक्त आजकल कई अन्य बीमे भी प्रचलित हैं। उन सबका उल्लेख करना पूर्णत: सम्भव नहीं उनमें से कुछ हैं – साईकिल बीमा, बैलगाड़ी बीमा, कुक्कुट बीमा, वायुयात्रा, वन बीमा, सुन्दरता का बीमा, उद्यमी का बीमा, होटल के ग्राहकों का बीमा, सामान का बीमा आदि।
(व) प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना – 18 से 70 वर्ष की आयु तक का व्यक्ति यह बीमा करवा सकता है। मात्र 12 की राशि प्रीमियम के रूप में भुगतान सीधे उसे व्यक्ति के बैंक खाते से हो जाता है। यह एक वर्षीय बीमा है। यह माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 2015 में प्रारम्भ किया गया है। जहाँ बीमित की मृत्यु पर 2 लाख Rs और शारीरिक क्षति अथवा हाथ या पैर के काम करने में असमर्थ होने पर 1 लाख Rs. का भुगतान बीमित को किया जाता है। इसके लिए बीमित का बैंक खाता होना अनिवार्य है।
(श) प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना – यह बीमा भी वर्तमान प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी द्वारा प्रारम्भ किया गया है। 5 वर्ष से 18 तक की आयु के सभी व्यक्तियों के लिए है। इसमें बीमित को 2 लाख Rs. तक की सुरक्षा प्रदान की जाती है। प्रीमियम का भुगतान सीधे बैंक खाते से किया जाता है। यह बीमा भी एक वर्ष के लिए होता है इसकी प्रीमियम राशि 380 Rs. प्रतिवर्ष है।
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