31/03/2020

Rajasthan Board RBSE Class 11 Accountancy Chapter 6 अन्तिम खाते

Rajasthan Board RBSE Class 11 Accountancy Chapter 6 अन्तिम खाते

RBSE Class 11 Accountancy Chapter 6 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

RBSE Class 11 Accountancy Chapter 6 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
अन्तिम खातों की रचना का उद्देश्य निर्धारण करना है
(अ) सकल लाभ एवं शुद्ध लाभ
(ब) स्वामित्व पूँजी एवं शुद्ध लाभ
(स) पूँजी एवं शुद्ध सम्पत्तियाँ
(द) शुद्ध लाभ या हानि एवं आर्थिक स्थिति की जानकारी ।
उत्तर-
(द) शुद्ध लाभ या हानि एवं आर्थिक स्थिति की जानकारी ।
प्रश्न 2.
संदिग्ध दायित्व को लिखा जाता है(अ) दायित्व पक्ष में
(ब) लाभ-हानि के डेबिट पक्ष में
(स) चिट्टे के नीचे टिप्पणी के रूप में
(द) उपरोक्त में कहीं पर भी नहीं।
उत्तर-
(स) चिट्टे के नीचे टिप्पणी के रूप में
प्रश्न 3.
प्रत्यक्ष व्यय को लिखा जाता है
(अ) व्यापार खाते के डेबिट पक्ष में
(ब) लाभ-हानि खाते के डेबिट पक्ष में
(स) विक्रय में घटाकर
(द) उपरोक्त में कहीं पर भी नहीं।
उत्तर-
(अ) व्यापार खाते के डेबिट पक्ष में
प्रश्न 4.
आस्थगित आयगत व्ययों को लिखा जाता है
(अ) व्यापार खाते के डेबिट पक्ष में
(ब) लाभ-हानि खाते के डेबिट पक्ष में
(स) चिट्टे के दायित्व पक्ष में
(द) चिट्टे के सम्पत्ति पक्ष में ।
उत्तर-
(द) चिट्टे के सम्पत्ति पक्ष में ।
प्रश्न 5.
व्यापार एवं लाभ-हानि खाते की प्रकृति होती है
(अ) व्यक्तिगत खाते की तरह
(ब) वस्तुगत खाते की तरह
(स) नाममात्र खाते एवं व्यक्तिगत खाते की तरह।
(द) स्मरणार्थ खाते की तरह।
उत्तर-
(स) नाममात्र खाते एवं व्यक्तिगत खाते की तरह।

RBSE Class 11 Accountancy Chapter 6 अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अप्रत्यक्ष व्यय किसे कहते हैं ?
उत्तर-
ऐसे व्यय जो तैयार माल को विक्रय करने के लिए किये जाते हैं, अप्रत्यक्ष व्यय कहलाते हैं, जैसे–कार्यालय एवं प्रशासनिक व्यय, विक्रय एवं वितरण व्यय, वित्तीय व्यय आदि ।
प्रश्न 2.
शुद्ध लाभ क्या है ?
उत्तर-
व्यवसाय की समस्त आयों का व्ययों पर आधिक्य शुद्ध लाभ कहलाता है।
प्रश्न 3.
सम्पत्तियों एवं दायित्वों की क्रमबद्धता क्या है ?
उत्तर-
सम्पत्तियों एवं दायित्वों की मदों को एक निश्चित क्रम में लिखना ही क्रमबद्धता कहलाता है।
प्रश्न 4.
तलपट एवं चिट्टे में दो अन्तर बताइए।
उत्तर-
  1. तलपट खाताबही की गणितीय शुद्धता की जाँच करने के लिए बनाया जाता है जबकि चिट्ठा व्यापार की आर्थिक स्थिति की जानकारी प्राप्त करने के लिए बनाया जाता है।
  2. तलपट में डेबिट और क्रेडिट पक्ष होते हैं जबकि चिट्टे में दायित्व और सम्पत्ति पक्ष होते हैं।
प्रश्न 5.
संदिग्ध दायित्व के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
  1. भुनाये गये बिलों सम्बन्धी दायित्व ।
  2. न्यायालय में विचाराधीन दावों से सम्बन्धित दायित्व ।।
प्रश्न 6.
क्रय एवं विक्रय का परिणाम किस खाते से प्राप्त किया जाता है ?
उत्तर-
व्यापार खाते से ।
प्रश्न 7.
अन्तिम खाते के दो प्रमुख उद्देश्य बताइए।
उत्तर-
  1. व्यवसाय का लाभ-हानि ज्ञात करना।
  2. व्यवसाय की आर्थिक स्थिति की जानकारी प्राप्त करना ।
प्रश्न 8.
अन्तिम स्टॉक को तलपट में समाहित करने की प्रविष्टि दीजिए।
उत्तर-
Closing Stock A/c Dr.
To Purchase A/C
(Being the closing stock brought into books)
प्रश्न 9.
“लाभ-हानि खाता एक तिथि का विवरण एवं चिट्ठा एक अवधि का विवरण है।” क्या आप इस कथन से सहमत हैं ? स्पष्ट करें।
उत्तर-
हाँ, क्योंकि एक तिथि विशेष को तैयार किया गया लाभ-हानि खाता मात्र उस लेखा अवधि (एक वर्ष) का परिणाम (शुद्ध लाभ अथवा हानि) प्रस्तुत करता है जबकि चिट्ठा लेखा अवधि की समाप्ति पर व्यवसाय की अब तक की आर्थिक स्थिति का चित्रण करता है।
प्रश्न 10.
पूँजीगत व्यय किसे कहते हैं ?
उत्तर-
पूँजीगत व्ययों से आशय ऐसे व्ययों से है जो व्यवसाय के लिए स्थायी सम्पत्तियाँ प्राप्त करने, बनाने, विस्तार एवं वृद्धि करने तथा पूँजी प्राप्त करने के उद्देश्य से किए जाते हैं।
प्रश्न 11.
आयगत व्यय क्या है ?
उत्तर-
आयगत व्यय से आशय ऐसे व्ययों से है जो किसी व्यवसाय के सामान्य संचालन के लिए किए जाते हैं।
प्रश्न 12.
आस्थगित आयगत व्ययों को समझाइए।
उत्तर-
ऐसे आयगत व्यय जिनका पूरा लाभ व्यवसाय को उसी वर्ष प्राप्त न होकर आगामी कई वर्षों तक प्राप्त होता है, उन्हें आस्थगित आयगत व्यय कहते हैं।
प्रश्न 13.
व्यापार खाते के डेबिट पक्ष में लिखी जाने वाली कोई चार मदें बतलाइए।
उत्तर-
  1. क्रय,
  2. मजदूरी,
  3. चुंगी,
  4. आन्तरिक गाड़ी भाड़ा।
प्रश्न 14.
शुद्ध क्रय एवं शुद्ध विक्रय क्या है ?
उत्तर-
शुद्ध क्रय = नकद क्रय + उधार क्रय – क्रय वापसी
शुद्ध विक्रय = नकद विक्रय + उधार विक्रय – विक्रय वापसी ।
प्रश्न 15.
तलपट में उल्लेखित वेतन एवं मजदूरी तथा मजदूरी एवं वेतन, अन्तिम खाते में कौन से खाते एवं पक्ष में लिखे जाएँगे ?
उत्तर-
तलपट में उल्लेखित वेतन एवं मजदूरी (Salaries and wages) अन्तिम खाते में लाभ-हानि खाते के डेबिट पक्ष में तथा मजदूरी एवं वेतन (Wages and Salaries) व्यापार खाते के डेबिट पक्ष में लिखे जाते हैं।
प्रश्न 16.
व्यापार खाते के डेबिट पक्ष का योग क्रेडिट पक्ष के योग से अधिक होने पर अन्तर की राशि क्या कहलाती है ?
उत्तर-
सकल हानि (Gross Loss) ।
प्रश्न 17.
तलपट का योग असमान होने पर चिट्टे का योग समान या असमान होता है । बताइए।
उत्तर-
असमान।
प्रश्न 18.
लाभ-हानि खाते के क्रेडिट पक्ष में लिखी जाने वाली कोई चार मदें बताइए।
उत्तर-
  • प्राप्त ब्याज (Interest received)
  • प्राप्त लाभांश (Dividend received)
  • प्राप्त कमीशन (Commission received)
  • स्थायी सम्पत्ति के विक्रय पर लाभ (Profit on sale of fixed assets)
प्रश्न 19.
लेखांकन में स्टॉक मूल्यांकन का क्या सिद्धान्त है ?
उत्तर-
स्टॉक का मूल्यांकन लागत मूल्य अथवा बाजार मूल्य दोनों में से जो कम हो, पर किया जाता है।
प्रश्न 20.
स्थायी सम्पत्तियों के कोई चार उदाहरण बतलाइए।
उत्तर-
  1. भूमि एवं भवन,
  2. फर्नीचर,
  3. मशीनरी,
  4. प्लाण्ट

RBSE Class 11 Accountancy Chapter 6 लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
पूँजीगत प्राप्ति एवं आयगत प्राप्ति में दो अन्तर बतलाइए।
उत्तर-
  • प्रदर्शन-पूँजीगत प्राप्ति चिड़े में दिखाई जाती है जबकि आयगत प्राप्ति व्यापार एवं लाभ-हानि खाते में दिखाई जाती है।
  • व्यवसाय संचालन-पूँजीगत प्राप्ति सामान्य व्यवसाय संचालन के परिणामस्वरूप प्राप्त नहीं होती है जबकि आयगत प्राप्ति सामान्य व्यवसाय संचालन के परिणामस्वरूप होती है।
प्रश्न 2.
सम्पत्तियों को तरलता क्रम में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर-
तरलता क्रम इस क्रम के अनुसार सम्पत्तियों को इस प्रकार व्यवस्थित किया जाता है, जिसमें सरलता से नकदी में बदली जा सकने वाली सम्पत्ति सबसे पहले लिखी जाती है और शेष उत्तरोत्तर क्रमानुसार लिखी जाती है, जैसे-Cash in Hand, Cash at Bank, Bills Receivable, Sundry Debtors, Prepaid Expenses, Stock, Work-in-Progress, Raw Material, Investments, Furniture, Plant and Machinery, Building, Patents, Goodwill आदि।
प्रश्न 3.
दायित्व पक्ष को स्थायित्वे क्रम में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर-
स्थायित्व क़म-इस क्रम के अनुसार लम्बी अवधि के दायित्व सर्वप्रथम लिखे जाते हैं। इसी प्रकार क्रमानुसार आगे लिखते जाते हैं । इस तरह सबसे अन्त में सर्वप्रथम भुगतान होने वाले दायित्व लिखे जाते हैं, जैसे-Capital, Loan on Mortgage, Bank Loan, Income Received in Advance, Sundry Creditors, Outstanding Expenses, Bills Payable, Bank Overdraft आदि।
प्रश्न 4.
निर्माणी खाते को समझाइए।
उत्तर-
ज़ो व्यापारिक संस्थाएँ वस्तुओं का निर्माण करके बेचती हैं वे वित्तीय वर्ष के अन्त में कारखाने में निर्मित माल की लागत ज्ञात करने के लिए निर्माण खाता बनाती हैं। यह व्यापार खाते का ही अंग होता है। निर्माण खाते में वस्तुओं की उत्पादन लागत ज्ञात करके उसे व्यापार खाते के नाम पक्ष में स्थानान्तरित किया जाता है।
निर्माण खाते के नाम पक्ष में वर्ष के प्रारम्भ का रहतिया में अर्द्धनिर्मित एवं कच्चा माल, कच्चे माल के क्रय सम्बन्धी समस्त व्यय; जैसे—मजदूरी, रेलगाड़ी भाड़ा आदि तथा माल के निर्माण सम्बन्धी सभी कारखाना व्यय दिखाये जाते हैं। जमा पक्ष में वर्ष के अन्त का अर्द्धनिर्मित तथा कच्चे माल का रहतिया, खराब माल के विक्रय से प्राप्त राशि को दिखाया जाता है।
नाम एवं जमा पक्षों के योग को अन्तर जमी पक्ष में निर्मित माल की लागत के नाम से रकम के खाने में लिखा जाता है। उत्पादित माल की लागत व्यापार खाते के नाम पक्ष में हस्तान्तरित की जाती है।
प्रश्न 5.
अन्तिम खाते किसे कहते हैं ? इसके दो उद्देश्य लिखिए।
उत्तर-
व्यवसाय में होने वाले लेन-देनों का लेखा सर्वप्रथम जर्नल में किया जाता है । इसके बाद उन्हें वर्गीकृत किया जाता है तथा उनका लेखा विभिन्न खातों में अलग-अलग कर दिया जाता है। वर्ष के अन्त में खातों को बन्द करके उनके शेष निकाल लिये जाते हैं। इन शेषों से तलपट तैयार कर लिया जाता है।
वर्ष के अन्त में पूरे वर्ष किये गये व्यवसाय का लाभ-हानि तथा व्यापार की आर्थिक स्थिति का ज्ञान प्राप्त करने के लिए तलपट की सहायता से व्यापार एवं लाभ-हानि खाता तथा चिट्ठा बनाये जाते हैं क्योंकि ये वित्तीय वर्ष के अन्त में बनाये जाते हैं, इसलिए इन्हें अन्तिम खाते कहते हैं। अन्तिम खातों के अन्तर्गत बनाये जाने वाले व्यापार खाते एवं लाभ-हानि खाते को आय विवरण कहा जाता है। ये व्यवसाय की एक वर्ष की हानि या लाभ का ज्ञान कराते हैं। आर्थिक चिट्ठा व्यवसाय की आर्थिक स्थिति का ज्ञान कराता है, इसलिए इसे स्थिति विवरण कहा जाता है।
कोई भी व्यापारिक संस्था एक वर्ष के पश्चात् अपने अन्तिम खाते बना सकती है। भारत सरकार द्वारा कर निर्धारण हेतु वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक निर्धारित किया गया है। जो सभी व्यापारिक प्रतिष्ठानों, संस्थाओं एवं कम्पनियों के लिए लेखा वर्ष के रूप में मान्य है।
उद्देश्य (Objects)-
  1. व्यवसाय का लाभ-हानि ज्ञात करना अन्तिम खातों के द्वारा ही सकल लाभ/हानि एवं शुद्ध लाभ/हानि का ज्ञान प्राप्त होता है।
  2. व्यवसाय की आर्थिक स्थिति का ज्ञान अन्तिम खाते बनाने का दूसरा उद्देश्य व्यवसाय की आर्थिक स्थिति का ज्ञान प्राप्त करना होता है जो आर्थिक चिट्टे की सहायता से होता है ।।
प्रश्न 6.
व्यापार खाते के उद्देश्य बतलाइए।
उत्तर-
  • भाल के लागत मूल्य एवं विक्रय मूल्य में अन्तर की जानकारी प्राप्त करना।
  • सकल लाभ अथवा सकल हानि निकालकर उसकी दर ज्ञात करना।
  • सकल लाभ या सकल हानि को तुलनात्मक अध्ययन करना ।
  • शुद्ध क्रय, शुद्ध विक्रय,रहतिया एवं प्रत्यक्ष व्ययों की जानकारी प्राप्त करना ।
प्रश्न 7.
लाभ-हानि खाते के उद्देश्य बतलाइए।
उत्तर-
  • सम्बन्धित वित्तीय वर्ष की शुद्ध लाभ/हानि ज्ञात करना ।
  • शुद्ध लाभ/हानि की दर ज्ञात करना।
  • शुद्ध लाभ या हानि की सहायता से भविष्य की प्रगति की योजनाएँ बनाना।
  • पिछले वर्षों के अपने लाभ-हानि खाते तथा अपनी जैसी अन्य फर्मों के लाभ-हानि खातों का तुलनात्मक अध्ययन करना ।
  • सभी अप्रत्यक्ष आयगत व्ययों की जानकारी प्राप्त कर उनमें कमी लाने हेतु योजना बनाना ।
प्रश्न 8.
अन्तिम प्रविष्टियों को समझाइए।
उत्तर-
खाता बही में खुले विभिन्न प्रकार के खातों को बन्द करके उनके शेषों को वित्तीय विवरण तैयार करने के उद्देश्य से हस्तान्तरित करने के लिए जो प्रविष्टियाँ की जाती हैं, उन्हें अन्तिम प्रविष्टियाँ कहते हैं।
प्रश्न 9.
स्थिति विवरण/चिट्ठा किसे कहते हैं ? उसके दो उद्देश्य बतलाइए।
उत्तर-
चिट्ठा एक वित्तीय विवरण-पत्र होता है जिसमें एक निश्चित तिथि को व्यापार की आर्थिक स्थिति को प्रदर्शित किया जाता है। चिट्टे के बायें पक्ष में पूँजी एवं व्यवसाय के समस्त दायित्वों को लिखा जाता है तथा इसके दायें पक्ष में समस्त सम्पत्तियों का लेखा किया जाता है। इसे स्थिति विवरण कहते हैं।
फ्रीमेन के अनुसार, “स्थिति विवरण निश्चित तिथि पर एक व्यक्ति के व्यापार की सम्पत्तियों, दायित्वों और स्वामित्वों की मदवार तालिका है।”
पामर के अनुसार, “स्थिति विवरण एक दी गई निश्चित तिथि का विवरण है जो एक ओर व्यापारी की सम्पत्तियों एवं अधिकारों और दूसरी ओर दायित्वों को प्रकट करता है।”
जे. आर. बाटलीबॉय के अनुसार, “चिट्ठा एक निश्चित तिथि पर व्यवसाय की ठीक-ठीक वित्तीय स्थिति की माप करने के लिए सम्पत्तियों तथा दायित्वों का एक वर्गीकृत विवरण है।”
उद्देश्य-
  1. व्यवसाय की वित्तीय स्थिति की जानकारी प्रदान करना ।
  2. सम्पत्तियों की प्रकृति एवं मूल्यों की जानकारी प्रदान करना ।
प्रश्न 10.
संदिग्ध दायित्व पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर-
ऐसे दायित्व जो किसी घटना के घटित हो जाने पर व्यापार के दायित्व बन सकते हैं अन्यथा नहीं, उन्हें संदिग्ध दायित्व कहते हैं। ये दायित्व जब तक दायित्व का रूप नहीं ले लेते तब तक इन्हें चिड़े में शामिल नहीं किया जा सकता है। इन्हें केवल चिट्टे के नीचे दायित्व पक्ष में टिप्पणी के रूप में दिखाया जाता है। उदाहरण के लिए भुनाये गये बिलों सम्बन्धी दायित्व, जमानत सम्बन्धी दायित्व, अंशधारियों से सम्बन्धित दायित्व, विचाराधीन दावों से सम्बन्धित दायित्व आदि ।।
प्रश्न 11.
अदृश्य सम्पत्ति चल सम्पत्ति एवं कृत्रिम सम्पत्तियों के दो-दो उदाहरण प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर-
अदृश्य सम्पत्ति-
  • ख्याति,
  • कॉपीराइट।
चल सम्पत्ति-
  • स्टॉक,
  • प्राप्यबिल ।
कृत्रिम सम्पत्ति-
  • प्रारम्भिक व्यय,
  • अभिगोपन कमीशन ।
प्रश्न 12.
परिचालन लाभ क्या है ? संक्षिप्त में समझाइए।
उत्तर-
व्यवसाय की सामान्य व्यावसायिक क्रियाओं से अर्जित किया जाने वाला लाभ संचालन लाभ कहलाता है । इसे ब्याज एवं कर से पूर्व आय (Earning before Interest and Tax) भी कहा जाता है । इसे सकल लाभ (Gross Profit) में से संचालन व्यय (Operating Expenses) को घटाकर निकाला जाता है। वे व्यय जो व्यवसाय की मुख्य अथवा सामान्य क्रियाओं से सम्बन्धित होते हैं, उन्हें संचालन व्यय कहते हैं। संचालन लाभ की गणना निम्नलिखित सूत्र के माध्यम से भी की जा सकती है
Operating Profit = Net Profit + Non-Operating Expenses – Non-Operating Income
प्रश्न 13.
आयगत व्यय एवं पूँजीगत व्यय में दो अन्तर बतलाइए।
उत्तर-
  • प्रकृति पूँजीगत व्यय स्थायी प्रकृति के होते हैं जबकि आयगत व्यय अस्थायी प्रकृति के होते हैं।
  • लाभ की अवधि पूँजीगत व्ययों का लाभ कई वर्षों तक मिलता है जबकि आयगत व्ययों का लाभ कम समय (एक वर्ष) के लिए ही मिलता है।
प्रश्न 14.
परिचालन लाभ की गणना में जिन मदों का समायोजन नहीं किया जाता है, उसके चार उदाहरण प्रस्तुत करें।
उत्तर-
  • स्थायी सम्पत्तियों के बेचने पर हानि (Loss on sale of fixed assets)
  • आग से नुकसान (Loss by fire)
  • दान और चन्दा (Donation and Charity)
  • ETH (Depreciation)
प्रश्न 15.
अन्तिम खातों में व्यक्तिगत, वस्तुगत एवं नाममात्र के खातों के शेषों को कहाँ लिखा एवं अन्तरण किया जाता है ?
उत्तर-
अन्तिम खातों में व्यक्तिगत एवं वस्तुगत (वास्तविक) खाते के शेष चिट्टे में लिखे जाते हैं तथा नाममात्र (अवास्तविक) खातों के शेष व्यापार एवं लाभ-हानि खाते में लिखे जाते हैं।
प्रश्न 16.
भारी विज्ञापन व्ययों का लेखा अन्तिम खातों में किस प्रकार किया जाता है ? उत्तर के आधार पर बतलाइए।
उत्तर-
भारी विज्ञापन व्यय का लाभ व्यवसाय में कई वर्षों तक प्राप्त होता है अत: यह एक आस्थगित आयगत व्यय होता है जिसे चिड़े के सम्पत्ति पक्ष में कृत्रिम सम्पत्ति मानकर तब तक दिखाया जाता है जब तक कि वह पूर्णरूपेण अपलिखित नहीं हो जाता।
प्रश्न 17.
स्थायी सम्पत्ति एवं चल सम्पत्ति में दो अन्तर बतलाइए।
उत्तर-
  • उद्देश्य स्थायी सम्पत्तियों का क्रय व्यवसाय में लाभ अर्जित करने के उद्देश्य से किया जाता है, जबकि चल सम्पत्तियों का क्रय सामान्य व्यवसाय संचालन के लिए किया जाता है।
  • अवधि–स्थायी सम्पत्तियों का लाभ व्यवसाय में कई वर्षों तक मिलता है जबकि चल सम्पत्तियाँ एक वर्ष की अवधि में रोकड़ में परिवर्तित हो जाती हैं।
प्रश्न 18.
अप्रत्यक्ष व्ययों के कोई चार उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
  • वेतन,
  • किराया दर एवं कर,
  • डाक व्यय,
  • स्टेशनरी ।
प्रश्न 19.
प्रत्यक्ष व्ययों के कोई चार उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
  • मजदूरी,
  • आन्तरिक गाड़ी भाड़ा,
  • आयात कर,
  • चुंगी
प्रश्न 20.
लेखांकन की अन्तिम अवस्था को बतलाइए। इसमें की जाने वाली रचना को भी प्रस्तुत करें।
उतर-
लेखांकन की अन्तिम अवस्था अन्तिम खाते हैं जिनमें व्यापार खाता, लाभ-हानि खाता एवं आर्थिक चिट्ठा तैयार किया जाता है।

RBSE Class 11 Accountancy Chapter 6 निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
अन्तिम खातों से आपको क्या आशय है ? इसके महत्त्व को समझाइए।
उत्तर-
अन्तिम खाते (Final Accounts)
व्यवसाय में होने वाले लेन-देनों का लेखा सर्वप्रथम जर्नल में किया जाता है । इसके बाद उन्हें वर्गीकृत किया जाता है तथा उनको लेखा विभिन्न खातों में अलग-अलग कर दिया जाता है। वर्ष के अन्त में खातों को बन्द करके उनके शेष निकाल लिये जाते हैं। इन शेषों से तलपट तैयार कर लिया जाता है।
वर्ष के अन्त में पूरे वर्ष किये गये व्यवसाय का लाभ-हानि तथा व्यापार की आर्थिक स्थिति का ज्ञान प्राप्त करने के लिए तलपट की सहायता से व्यापार एवं लाभ-हानि खाता तथा चिट्ठा बनाये जाते हैं। क्योंकि ये वित्तीय वर्ष के अन्त में बनाये जाते हैं इसलिए इन्हें अन्तिम खाते कहते हैं । अन्तिम खातों के अन्तर्गत बनाये जाने वाले व्यापार खाते एवं लाभ-हानि खाते को आय विवरण कहा जाता है । ये व्यवसाय की एक वर्ष की हानि या लाभ का ज्ञान कराते हैं। आर्थिक चिट्ठा व्यवसाय की आर्थिक स्थिति का ज्ञान कराता है इसलिए इसे स्थिति विवरण कहा जाता है।
कोई भी व्यापारिक संस्था एक वर्ष के पश्चात् अपने अन्तिम खाते बना सकती है। भारत सरकार द्वारा कर निर्धारण हेतु वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक निर्धारित किया गया है। जो सभी व्यापारिक प्रतिष्ठानों, संस्थाओं एवं कम्पनियों के लिए लेखा वर्ष के रूप में मान्य है।
अन्तिम खाते अन्तिम खातों का महत्त्व (lmportance of Final Accounts)-
अन्तिम खातों का व्यापार से सम्बन्धित निर्णय लेने में महत्वपूर्ण स्थान होता है। अन्तिम खातों के आधार पर ही प्रबन्धक, गिकर्ता, लेनदार, ऋणदाता, कर्मचारी एवं सरकार व्यापार के किसी भी लेखा वर्ष के लाभ या हानि को ज्ञान प्राप्त करते हैं तथा अन्तिम खातों से ही व्यापार की आर्थिक स्थिति की जानकारी प्राप्त करते हैं । अन्तिम खातों के महत्त्व को निम्नलिखित बिन्दुओं से स्पष्ट किया जा सकता है
  1. व्यवसाय को लाभ-हानि ज्ञात करना अन्तिम खातों के द्वारा ही सकल लाभ/हानि एवं शुद्ध लाभ/हानि का ज्ञान प्राप्त होता है । यदि व्यापार खाते तथा लाभ-हानि खाते नहीं बनाये जाते तो व्यवसाय से होने वाले लाभ/हानि का ज्ञान नहीं हो पाता ।।
  2. व्यवसाय की आर्थिक स्थिति का ज्ञान अन्तिम खातों के अन्तर्गत आर्थिक चिट्ठा बनाया जाता है जिससे व्यवसाय के स्वामी, लेनदार, विनियोजक तथा अन्य पक्ष व्यवसाय की आर्थिक स्थिति का ज्ञान प्राप्त कर भविष्य के लिए निर्णय ले सकते हैं।
  3. ऋण लेने में सहायक बैंक तथा वित्तीय संस्थाएँ उन्हीं व्यवसायों को ऋण देती हैं जिनकी वित्तीय स्थिति सुदृढ़ होती है तथा लाभ कमाने की अच्छी क्षमता होती है। इनकी जानकारी वे अन्तिम खातों से ही करती है।
  4. व्यवसाय के प्रबन्ध में सहायक-व्यवसाय के अन्तिम खातों से उसके बारे में जानकारी जुटाकर ही प्रबन्धक महत्त्वपूर्ण निर्णय लेते हैं तथा भविष्य की योजनाएँ बनाते हैं।
  5. तुलनात्मक विश्लेषण में सहायक अन्तिम खातों की सहायता से अपनी ही संस्था के गतवर्षों के परिणामों तथा अन्य संस्थाओं के परिणामों का तुलनात्मक अध्ययन करके व्यवसाय की उन्नति या अवनति की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
  6. कर निर्धारण-आयकर, बिक्री कर आदि की गणना अन्तिम खातों में बनाये जाने वाले व्यापार खाते एवं लाभ-हानि खाते के आधार पर की जा सकती है।
प्रश्न 2.
अन्तिम प्रविष्टियाँ किसे कहते हैं ? विस्तार से समझाइए।
उत्तर-
अन्तिम प्रविष्टियाँ (Final Entries)
खाताबही में खुले विभिन्न प्रकार के खातों को बन्द करके, उनके शेषों का वित्तीय विवरण तैयार करने के उद्देश्य से हस्तान्तरित करने के लिए जो प्रविष्टियाँ की जाती हैं, उन्हें अन्तिम प्रविष्टियाँ कहते हैं।
उदाहरण द्वारा स्पष्टीकरण-
व्यापार खाता बनाते समय की जाने वाली अन्तिम प्रविष्टियाँ
(1) उन खातों की अन्तिम प्रविष्टि जिन्हें व्यापारिक खाते के डेबिट पक्ष में हस्तान्तरित किया जाता है
Trading A/c Dr.
To Opening Stock A/C
To Purchase A/c
To Wages A/c
To Direct Expenses A/c
To Carriage A/c
To Gas, Fuel and Water A/c
To Manufacturing Expenses A/c
To Factory Rent and Light A/C
To Custom Duty A/C
(Being transfer of above account to the Debit side of trading account)
(2) उन खातों की अन्तिम प्रविष्टि जिन्हें व्यापारिक खाते के क्रेडिट में हस्तान्तरित किया जाता है।
Sales A/C Dr.
Closing Stock A/c Dr.
To Trading A/C
(Being transfer of above account to the credit side of trading account)
(3) अन्तिम प्रविष्टि की आवश्यकता स्वयं व्यापारिक खाते को बन्द करने के लिए भी पड़ती है।
(a) सकल लाभ होने पर
Trading A/C Dr.
To Gross Profit A/C
(Being transfer of gross profit to the profit and loss account)
(b) सकल हानि होने पर।
Gross Loss A/C Dr.
To Trading A/C
(Being transfer of gross loss to the profit and loss account)
लाभ-हानि खाते से सम्बन्धित अन्तिम प्रविष्टियाँ-
(4) समस्त व्ययों एवं हानियों के खातों के शेषों को, लाभ-हानि खाते के डेबिट में हस्तान्तरित करने पर,
Profit Loss A/C
Dr. To Salaries A/c
To Rent, Rate and Taxes A/c
To General Expenses A/c
To Other Expenses A/c
(Being debit balance of nominal accounts transferred to profit and loss account)
(5) समस्त लाभ व आय के खातों के शेषों को लाभ-हानि खाते के क्रेडिट में हस्तान्तरित करने पर
Interest Received A/C Dr.
Commission Received A/C Dr.
Rent Received A/C Dr.
Other Income A/c Dr.
To Profit Loss A/C
(Being credit balance of nominal account transferred to profit and loss account)
(6) लाभ-हानि खाते के क्रेडिट शेष अर्थात् शुद्ध लाभ को हस्तान्तरित करने के लिए
Net Profit A/C Dr.
To Capital A/c
(Being transfer entry made)
(7) लाभ-हानि खाते के डेबिट शेष अर्थात् शुद्ध हानि को हस्तान्तरित करने के लिए
Capital A/c Dr.
To Net Loss A/C
(Being transfer entry made)
प्रश्न 3.
अन्तिम खातों पर एक विस्तृत विवेचना प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर-
अन्तिम खाते (Final Accounts)
व्यवसाय में होने वाले लेन-देनों का लेखा सर्वप्रथम जर्नल में किया जाता है । इसके बाद उन्हें वर्गीकृत किया जाता है तथा उनका लेखा विभिन्न खातों में अलग-अलग कर दिया जाता है। वर्ष के अन्त में खातों को बन्द करके उनके शेष निकाल लिये जाते हैं। इन शेषों से तलपट तैयार कर लिया जाता है।
वर्ष के अन्त में पूरे वर्ष किये गये व्यवसाय का लाभ-हानि तथा व्यापार की आर्थिक स्थिति का ज्ञान प्राप्त करने के लिए तलपट की सहायता से व्यापार एवं लाभ-हानि खाता तथा चिट्ठा बनाये जाते हैं। क्योंकि ये वित्तीय वर्ष के अन्त में बनाये जाते हैं, इसलिए इन्हें अन्तिम खाते कहते हैं। अन्तिम खातों के अन्तर्गत बनाये जाने वाले व्यापार खाते एवं लाभ-हानि खाते को आय विवरण कहा जाता है। ये व्यवयाय की एक वर्ष की हानि या लाभ का ज्ञान कराते हैं । आर्थिक चिट्ठा व्यवसाय की आर्थिक स्थिति का ज्ञान कराता है, इसलिए इसे स्थिति विवरण कहा जाता है ।
कोई भी व्यापारिक संस्था एक वर्ष के पश्चात् अपने अन्तिम खाते बना सकती है। भारत सरकार द्वारा कर निर्धारण हेतु वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक निर्धारित किया गया है। जो सभी व्यापारिक प्रतिष्ठानों, संस्थाओं एवं कम्पनियों के लिए लेखा वर्ष के रूप में मान्य है।
बनाए जाने वाले खाते – अन्तिम खातों के अन्तर्गत निम्नलिखित खाते खोले जाते हैं-
(1) व्यापार खाता (Trading Account) – यह अवास्तविक या नाममात्र प्रकृति का खाता है । यह माल के लागत मूल्य तथा विक्रय मूल्य में अन्तर को प्रकट करता है । इस खाते के ऋणी पक्ष में माल की लागत को बताने वाली मदें लिखी जाती हैं तथा धनी पक्ष में माल की बिक्री एवं अन्तिम स्टॉक को दिखाया जाता है। इस प्रकार यदि इसके धनी पक्ष का योग ऋणी पक्ष के योग से अधिक होता है तो सकल (Gross Profit) निकलता है और यदि ऋणी पक्ष का योग धनी पक्ष के योग से अधिक होता है तो सकल हानि (Gross Loss) निकलती है। । कम्पनी अधिनियम, 1956 में व्यापार खाते के बारे में कोई उल्लेख नहीं है। अत: वर्तमान में (व्यापार एवं लाभ-हानि खाता) या केवल ‘लाभ-हानि खाता’ शीर्षक लिखकर इसके प्रथम भाग में व्यापार खाता तथा द्वितीय भाग में लाभ-हानि खाता बनाया जाता है।
(2) लाभ-हानि खाता (Profit and Loss Account) – अन्तिम खाते तैयार करने के दूसरे चरण में लाभ-हानि खाता बनाया जाता है। यह खाता भी अवास्तविक या नाममात्र का खाता हैं। इसमें सबसे पहले व्यापार खाते से ज्ञात सकल लाभ/हानि का लेखा किया जाता है । सकले लाभ होने पर खाते के क्रेडिट पक्ष में तथा सकल हानि होने पर इसके डेबिट पक्ष में लेखा किया जाता है । इसके बाद इस खाते के डेबिट पक्ष में सभी आयगत अप्रत्यक्ष व्यय तथा क्रेडिट पक्ष में सभी अप्रत्यक्ष आयगत आगम लिखे जाते हैं । इस खाते से व्यवसाय की शुद्ध लाभ/हानि का ज्ञान होता है जिसे अन्त में पूँजी खाते में हस्तान्तरित कर दिया जाता है। अतः हम यह कह सकते हैं कि वह खाता जो व्यवसाय की शुद्ध लाभ/हानि को प्रदर्शित करता है, उसे लाभ-हानि खाता कहते हैं।
कार्टर के अनुसार, “लाभ हानि खाते का आशय उस खाते से है जिसमें समस्त आय तथा व्यय एकत्रित किये जाते हैं जिससे आय की व्यय से या व्यय की आय से अधिकता जानी जा सके।”
(3) आर्थिक चिट्ठा (Balance Sheet) – चिट्ठा एक वित्तीय विवरण है जिसमें एक निश्चित तिथि पर व्यापारी की लेखा पुस्तकों में विद्यमान, सम्पत्तियों एवं दायित्वों का उल्लेख किया जाता है । इसमें व्यक्तिगत सम्पत्तियों, दायित्वों एवं पूँजी से सम्बन्धित खातों के शेष लिखे जाते हैं। दायित्वों को चिट्टे के बायें भाग में तथा सम्पत्तियों को चिट्टे के दायें भाग में लिखा जाता है। विभिन्न विद्वानों ने चिट्टे को निम्नलिखित प्रकार से परिभाषित किया है
फ्रीमेन के अनुसार, “स्थिति विवरण निश्चित तिथि पर एक व्यक्ति के व्यापार की सम्पत्तियों, दायित्वों और स्वामित्वों की मदवार तालिका है।”
पामर के अनुसार, “स्थिति विवरण एक दी गई निश्चित तिथि का विवरण है जो एक ओर व्यापारी की सम्पत्तियों एवं अधिकारों और दूसरी ओर दायित्वों को प्रकट करता है ।
प्रश्न 4.
व्यापार एवं लाभ-हानि खाते से क्या तात्पर्य है ? इसमें लिखी जाने वाली मदों सहित प्रारूप प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर-
व्यापार खाते का प्रारूप
Format of Trading A/c for the year ending………
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 6 अन्तिम खाते 4a
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 6 अन्तिम खाते 4a.1
व्यापार खाते में आने वाली मदें – व्यापार खाते में दो पक्ष होते हैं। प्रत्येक पक्ष में लिखी जाने वाली प्रमुख मदों का विवरण निम्न प्रकार है-
व्यापार खाते के डेबिट पक्ष की मदें (Items of Debit Side of Trading Account)
1. प्रारम्भिक रहतिया (Opening Stock) – पिछले वर्ष का अन्तिम रहतिया चालू वर्ष का प्रारम्भिक रहतिया कहलाता है । इसे व्यापार खाते के डेबिट पक्ष में सबसे पहले लिखा जाता है। यह निम्नलिखित प्रकार का हो सकता है
  • कच्चे माल (Raw Materials) का रहतिया
  • अर्द्ध-निर्मित माल (Semi-finished Goods) का रहतिया
  • अपूर्ण निर्मित माल (Work-in-Progress) का रहतिया
  • तैयार माल (Finished Goods) का रहतिया।।
2. क्रय (Purchases) – व्यवसाय के नकद (Cash) तथा उधार (Credit) दोनों ही क्रयों का योग इस शीर्षक के अन्तर्गत व्यापार खाते के डेबिट पक्ष में दिखाया जाता है । इसमें से निम्नलिखित मदों को घटाकर दिखाया जाता है
  • क्रय वापसी (Purchases Returns or Returns Inward)
  • माल का आहरण (Drawings of Goods)
  • दान में दिया गया माल (Goods given in charity)
  • नमूने के रूप में दिया गया माल (Goods given as samples)
  • क्रय पर छूट (Discount on Purchases)
  • माल की चोरी होना (Loss by theft of Goods) ।।
3. प्रत्यक्ष व्यय (Direct Expenses) – जो व्यय माल को क्रय करने तथा उसे गोदाम तक पहुँचाने पर किये जाते हैं वे प्रत्यक्ष व्यय कहे जाते हैं, जैसे-भाड़ा (Freight), ढुलाई (Carriage), चुंगी (Octroi), आयात कर (Import duty), सीमा शुल्क (Custom Duty), गोदी कर (Dock Dues), मजदूरी (Wages), बीमा (Insurance) आदि ।
4. निर्माण सम्बन्धी व्यय (Manufacturing Expenses) – जो संस्था निर्माण कार्य में लगी होती है, उसके कच्चे माल को निर्मित माल में बदलने के व्यय निर्माण व्यय कहलाते हैं, जैसे कारखाना मजदूरी (Factory wages), कारखाना किराया (Factory Rent), गैस (Gas), ईंधन (Fuel), प्रकाश (Light), शक्ति (Power) आदि ।।
व्यापार खाते के क्रेडिट पक्ष की मदें (Items of Credit Side of Trading Account)-
1. विक्रय (Sales) – बिक्री की राशि व्यापार खाते के क्रेडिट पक्ष में दर्शायी जाती है। इसमें से विक्रय वापसी (Sales Return or Return Inward) तथा विक्रय पर छूट को घटाकर दिखाया जाता है।
2. अन्तिम रहतिया (Closing Stock) – वर्ष के अन्त में जो बिना बिका हुआ माल रह जाता है उसे अन्तिम रहतिया कहते हैं। इसमें कच्चा माल, अर्द्धनिर्मित माल या निर्मित माल शामिल हो सकते हैं । अन्तिम रहतिया का मूल्यांकन बाजार मूल्ये या लागत मूल्य में से जो कम होता है उस पर किया जाता है। यदि अन्तिम रहतिया तलपट के बाहर दिखाया गया है तो इसे व्यापार खाते के क्रेडिट पक्ष में तथा चिट्टे के सम्पत्ति पक्ष में दर्शाया जाता है और यदि इसे तलपट में दिखाया गया है तो इसे केवल चिट्टे के सम्पत्ति पक्ष में दर्शाया जाता है ।
व्यापार खाते का शेष निकालना (Balancing of Trading Account)
अन्य खातों की भाँति ही व्यापार खाते का भी शेष निकाला जाता है। यदि धनी पक्ष का योग अधिक होता है तो उसमें से ऋणी पक्ष के योग को घटाकर सकल लाभ (Gross Profit) प्राप्त होता है। यदि ऋणी पक्ष का योग अधिक होता है तो उसमें से धनी पक्ष के योग को घटाकर सकल हानि (Gross Loss) प्राप्त होती है। इस प्रकार प्राप्त सकल लाभ या हानि को निम्नलिखित प्रविष्टि के माध्यम से लाभ-हानि खाते में अन्तरित कर दिया जाता है
Profit and Loss A/C for the year ending……..
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 6 अन्तिम खाते 4a.2
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 6 अन्तिम खाते 4a.3
लाभ-हानि खाते के डेबिट पक्ष की मदें (Items of Debit Side of Profit and Loss Account)
  1. सकल हानि (Gross Loss) – यदि व्यापार खाते में सकल हानि निकलती है तो उसे लाभ-हानि खाते के डेबिट पक्ष में दिखाया जाता है।
  2. अप्रत्यक्ष व्यय (Indirect Expenses) – वे व्यय जो माल के व्यापार स्थल पर पहुँचने के बाद विक्रय करने के लिए किये जाते हैं, उन्हें अप्रत्यक्ष व्यय कहते हैं। इनमें विभिन्न प्रशासनिक व्ययों, विक्रय एवं वितरण व्ययों तथा वित्तीय व्ययों को शामिल किया जाता है।
  3. हानियाँ (Losses) – व्यापार से सम्बन्धित सभी आयगत हानियों तथा स्थायी सम्पत्तियों के विक्रय से होने वाली हानियों का लेखा लाभ-हानि खाते के डेबिट पक्ष में किया जाता है। इनमें मूल्यह्रास, डूबत ऋण, आग से माल की हानि, माल की चोरी आदि को शामिल किया जाता है ।
लाभ-हानि खाते के क्रेडिट पक्ष की मदें (Items of Credit Side of Profit and Loss Account)-
  1. सकल लाभ (Gross Profit) – व्यापार खाते से ज्ञात सकल लाभ का लाभ-हानि खाते के क्रेडिट पक्ष में लेखा किया जाता है।
  2. अप्रत्यक्ष आय एवं लाभ (Indirect Income and Profit) – अप्रत्यक्ष आय एवं लाभों का लेखा लाभ-हानि खाते के क्रेडिट पक्ष में किया जाता है। इसमें सम्पत्तियों की बिक्री से प्राप्त लाभ, प्राप्त बट्टा, प्राप्त कमीशन, विनियोग पर ब्याज, प्राप्त किराया, डूबत ऋण की वसूली, प्राप्त क्षतिपूर्ति, देनदारों से प्राप्त ब्याज आदि को शामिल किया जाता है।
शुद्ध लाभ (Net Profit) अथवा शुद्ध हानि (Net Loss) की गणना सभी मदें लिख लेने के बाद दोनों पक्षों का अलग-अलग योग किया जाता है। यदि लाभ-हानि खाते के डेबिट पक्ष का योग क्रेडिट पक्ष के योग से अधिक होता है तो अन्तर की राशि शुद्ध हानि (Net Loss) कहलाती है और यदि इसके क्रेडिट पक्ष का योग डेबिट पक्ष के योग से अधिक होता है तो अन्तर की राशि शुद्ध लाभ (Net Profit) कहलाती है।
प्रश्न 5.
अन्तिम खातों की रचना में चिट्ठा को क्यों तैयार किया जाता है ? इसमें लिखी जाने वाली मदों को समझाते हुए तरलता व स्थायित्व क्रम में प्रारूप प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर-
चिट्टे का अर्थ (Meaning of Balance Sheet)
चिट्ठा एक वित्तीय विवरण है जितन एक निश्चित तिथि पर व्यापारी की लेखा पुस्तकों में विद्यमान सम्पत्तियों एवं दायित्वों का उल्लेख किया जाता है। इसमें व्यक्तिगत सम्पत्तियों, दायित्वों एवं पूँजी से सम्बन्धित खातों के शेष लिखे जाते हैं। दायित्वों को चिट्टे के बायें भाग में तथा सम्पत्तियों को चिट्टे के दायें भाग में लिखा जाता है। विभिन्न विद्वानों ने चिट्टे को निम्नलिखित प्रकार से परिभाषित किया है–
फ्रीमेन के अनुसार, “स्थिति विवरण निश्चित तिथि पर एक व्यक्ति के व्यापार की सम्पत्तियों, दायित्वों और स्वामित्वों की मदवार तालिका है।”
पामर के अनुसार, “स्थिति विवरण एक दी गई निश्चित तिथि का विवरण है जो एक ओर व्यापारी की सम्पत्तियों एवं अधिकारों और दूसरी ओर दायित्वों को प्रकट करता है।”
चिट्टे का निर्माण करने के कारण-
  1. व्यापार की वित्तीय स्थिति की जानकारी के लिए।
  2. सम्पत्तियों की प्रकृति एवं मूल्यों की जानकारी के लिए।
  3. दायित्वों की प्रकृति एवं मूल्यों की जानकारी के लिए।
  4. अगले वर्ष के शुरू में प्रारम्भिक प्रविष्टियाँ करने हेतु ।
  5. व्यवसाय की शोधन क्षमता (Solvency) की जानकारी के लिए।
  6. व्यवसाय की लाभार्जन क्षमता का ज्ञान प्राप्त करने के लिए।
चिट्टे की मदें (Items of Balance Sheet) –
दायित्व (Liabilities)-दायित्वों से आशय स्वामी की पूँजी के अतिरिक्त अन्य वित्तीय ऋणों से है। ये निम्नलिखित तीन प्रकार के होते हैं-
  • बाह्य दायित्व
  • आन्तरिक दायित्व
  • संदिग्ध दायित्व ।
दायित्वों को निम्न प्रकार भी वर्गीकृत किया जा सकता है
  • स्थायी दायित्व
  • चालू दायित्व
  • संदिग्ध दायित्व ।
संदिग्ध दायित्व (Contingent Liabilities) – जो दायित्व किसी विशेष घटना के घटित होने पर ही व्यापार के दायित्व बन सकते हैं अन्यथा नहीं, ऐसे दायित्व संदिग्ध दायित्व कहलाते हैं। इन्हें चिड़े में नहीं दर्शाया जाता है बल्कि इन्हें दायित्व पक्ष में नीचे टिप्पणी के रूप में दिखाया जाता है। उदाहरण के लिए-भुनाये गये बिलों सम्बन्धी दायित्व,जमानत सम्बन्धी दायित्व, विचाराधीन दावों से सम्बन्धित दायित्व आदि ।।
सम्पत्तियाँ (Assets) – व्यक्तिगत एवं वास्तविक खातों के डेबिट शेषों को सम्पत्ति पक्ष में दिखाया जाता है। इनका वर्गीकरण निम्न प्रकार किया गया है
  • स्थायी सम्पत्तियाँ
  • चालू सम्पत्तियाँ
  • विनियोग ।
विनियोग (Investment) – अपने अतिरिक्त धन को अन्य संस्था में लाभ के उद्देश्य से लगाना ही विनियोग कहलाता है। यह दो प्रकार का होता है-
  1. दीर्घकालीन तथा
  2. अल्पकालीन ।
जो विनियोग लम्बे समय के लिए किये जाते हैं वे दीर्घकालीन तथा जो कम समय के लिए किये जाते हैं वे अल्पकालीन विनियोग कहलाते हैं।
विभिन्न सम्पत्तियों एवं दायित्वों को चिट्टे में निम्नलिखित तीन क्रम में दिखाया जा सकता है
  1. तरलता क्रम (Liquidity Order),
  2. स्थायित्व क्रम (Permanence Order)
  3. शीर्षरूप (Vertical Form) ।
1. तरलता क्रम (Liquidity Order) – इस क्रम के अनुसार सम्पत्ति पक्ष में सम्पत्तियों को इस प्रकार दर्शाया जाता है कि जो सबसे पहले रोकड़ में बदली जा सकती है वह सबसे पहले लिखी जाती है इसी प्रकार आगे की सम्पत्तियाँ लिखी जाती हैं। इस प्रकार सर्वाधिक देर से रोकड़ में बदली जाने वाली सम्पत्ति सबसे बाद में लिखी जाती है।
दायित्व पक्ष में सबसे पहले चुकाये जाने वाले दायित्व सबसे पहले लिखे जाते हैं, इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए सबसे देर से भुगतान किये जाने वाले दायित्व सबसे बाद में लिखे जाते हैं।
तरलता क्रम के अनुसार चिट्टे का नमूना (Balance Sheet in Order of Liquidity)
Balance Sheet as on ……..
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 6 अन्तिम खाते 5a
2. स्थायित्व क्रम (Permanence Order) – इस क्रम के अनुसार चिट्ठा बनाने के लिए सम्पत्ति पक्ष में सर्वाधिक स्थायी सम्पत्ति को सबसे पहले लिखा जाता है तथा जो सबसे कम स्थायित्व रखती है उसे सबसे बाद में लिखा जाता है। इसी प्रकार दायित्व पक्ष में जो दायित्व सबसे बाद में भुगतान किये जाते हैं वे सबसे पहले लिखे जाते हैं। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए जो सबसे पहले भुगतान करने हैं उन्हें सबसे बाद में लिखा जाता है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि स्थायित्व क्रम तरलता क्रम के ठीक विपरीत होता है।
स्थायित्व क्रम के अनुसार चिट्टे का नमूना (Specimen of Balance Sheet in Order of Permanence)
Balance Sheet as on……
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 6 अन्तिम खाते 5a.1

RBSE Class 11 Accountancy Chapter 6 आंकिक प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित सूचनाओं से सकल लाभ एवं बेचे गये माल की लागत ज्ञात कीजिए।
शुद्ध बिक्री (Net Sales) Rs 6,00,000, सकल लाभ लागत का 20% है।
उत्तर:
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 6 अन्तिम खाते 1
बेचे गये माल की लागत = शुद्ध बिक्री – सकल लाभ
= 6,00,000 – 1,00,000
= 5,00,000
प्रश्न 2.
निम्नलिखित सूचनाओं से प्रारम्भिक स्टॉक की गणना कीजिए-
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 6 अन्तिम खाते 2
उत्तर:
Trading A/C for the year ending ………
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 6 अन्तिम खाते 2.1
Working Note : Gross Profit = 40,50,000 x \frac { 25 }{ 100 } = Rs 10,12,500
नोट- Carriage Outward एक अप्रत्यक्ष व्यय है जो व्यवहार खाते में नहीं आता है।
प्रश्न 3.
बेचे गए माल की लागत का निर्धारण कीजिए।
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 6 अन्तिम खाते 3
उत्तर:
बेचे गए माल की लागत = प्रारम्भिक स्टॉक + शुद्ध क्रय + प्रत्यक्ष व्यय – अन्तिम स्टॉक
= 50,000 + (2,50,000 – 20,000) + 30,000 – 80,000
= 50,000 + 2,30,000 + 30,000) – 80,000 = Rs 2,30,000
नोट-विज्ञापन व्यये अप्रत्यक्ष व्यय है।
प्रश्न 4.
निम्नलिखित सूचनाओं से अन्तिम स्टॉक की गणना कीजिए।
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 6 अन्तिम खाते 4
उत्तर:
बेचे गए माल की लागत = प्रारम्भिक स्टॉक + शुद्ध क्रय + प्रत्यक्ष व्यय – अन्तिम स्टॉक ……(1)
बेचे गए माल की लागत = शुद्ध विक्रय + सकल हानि
= 7,00,000 + 50,000
= 7,50,000
बेचे गए माल की लागत का मान समीकरण (1) में रखने पर,
7,50,000 = 3,50,000 + 4,75,000 + 75,000 + 70,000 – अन्तिम स्टॉक
7,50,000 = 9,70,000 – अन्तिम स्टॉक
अन्तिम स्टॉक = 9,70,000 – 7,50,000 = Rs 2,20,000
नोट – अन्तिम स्टॉक का मान व्यापार खाता बनाकर भी निकाला जा सकता है।
Trading A/C for the year ending ……..
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 6 अन्तिम खाते 4.1
प्रश्न 5.
निम्नलिखित सूचनाओं से शुद्ध लाभ की गणना कीजिए।
नकद विक्रय (Cash Sales) 4,00,000, उधार विक्रय (Credit Sales) 5,00,000, बेचे गये माल की लागत (Cost of Goods Sold) 6,50,000, क्रय पर किये गये व्यय (Expenses on Purchase) 35,000, विक्रय पर किये गये व्यय (Expenses on Sales) 40,000
उत्तर:
कुल विक्रय = नकद विक्रय + उधार विक्रय
= 4,00,000 + 5,00,000 = 9,00,000
सकल लाभ = शुद्ध विक्रय – बेचे गये माल की लागत
= 9,00,000 – 6,50,000 = 2,50,000
शुद्ध लाभ = सकल लाभ – विक्रय पर किए गए व्यय
= 2,50,000 – 40,000 = 2,10,000
प्रश्न 6.
निम्नलिखित तलपट से 31 मार्च, 2015 को समाप्त वर्ष के लिए अन्तिम खातों की रचना कीजिए।
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 6 अन्तिम खाते 6
अन्तिम स्टॉक (Closing Stock) का मूल्यांकन Rs 62,500
उत्तर:
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 6 अन्तिम खाते 6.1
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 6 अन्तिम खाते 6.2
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 6 अन्तिम खाते 6.3

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Rajasthan Board RBSE Class 11 Accountancy Chapter 5 तलपट एवं अशुद्धियों का सुधार

Rajasthan Board RBSE Class 11 Accountancy Chapter 5 तलपट एवं अशुद्धियों का सुधार

RBSE Class 11 Accountancy Chapter 5 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

RBSE Class 11 Accountancy Chapter 5 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
तलपट ………….. है।
(अ) अन्तिम खाता
(ब) एक सूची
(स) सहायक बही
(द) एक खाता
उत्तर-
(ब) एक सूची
प्रश्न 2.
नरेश को चुकाये Rs 5,000 महेश के खाते में नाम कर दिये । यह अशुद्धि है।
(अ) भूल की
(ब) हिसाब की
(स) क्षतिपूरक
(द) सैद्धान्तिक
उत्तर-
(ब) हिसाब की
प्रश्न 3.
तलपट के दोनों पक्षों का योग बराबर नहीं आयेगा । यदि
(अ) उमा से प्राप्त राशि Rs 800 उशा के खाते में जमा कर दी।
(ब) भावना ने Rs 1,200 का माल लौटाया जिसा लेखा नहीं किया।
(स) भंवरलाल से कमीशन प्राप्त हुआ, जिसे कमीशन खाते में नाम कर दिया Rs 250
(द) फर्नीचर खरीदा Rs 3,700 जिससे क्रय खाते को नाम कर दिया
उत्तर-
(स) भंवरलाल से कमीशन प्राप्त हुआ, जिसे कमीशन खाते में नाम कर दिया Rs 250
प्रश्न 4.
तलपट का जमा पक्ष Rs 4,000 से अधिक शेष दर्शा रहा है। इसका कारण है।
(अ) सृष्टि से प्राप्त डूबत ऋण की राशि Rs 4,000 उसके व्यक्तिगत खाते में जमा कर दी
(ब) पुरानी मशीन विनोद को बेची Rs 8,000 जिसे विक्रय बही में लिख दिया
(स) ममता को माल बेचा Rs 1,000 पर लेखा करना भूल गये ।
(द) आनन्द को चुकाये Rs 2,000 आनन्द के खाते में जमा कर दिया
उत्तर-
(द) आनन्द को चुकाये Rs 2,000 आनन्द के खाते में जमा कर दिया
प्रश्न 5.
तलपट बनाने का मुख्य उद्देश्य है।
(अ) सहायक बहियों से की गई खतौनी की जाँच के लिये
(ब) लेखा पुस्तकों की गणितीय शुद्धता की जाँच के लिए।
(स) इसे दोहरा लेखा प्रणाली का हिस्सा बनाने के लिए।
(द) सभी खातों को एक स्थान पर लिखना।
उत्तर-
(ब) लेखा पुस्तकों की गणितीय शुद्धता की जाँच के लिए।
प्रश्न 6.
तलपट के दोनों पक्षों का योग समान नहीं आने पर अन्तर की राशि लिखी जाती है।
(अ) भूल-चूक खाते में
(ब) व्यापार खाते में
(स) लाभ-हानि खाते में
(द) किसी भी खाते में
उत्तर-
(अ) भूल-चूक खाते में

RBSE Class 11 Accountancy Chapter 5 अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
तलपट किसे कहते हैं?
उत्तर-
तलपट खाताबही के सभी खातों के योग या शेषों की एक सूची है जिसके नाम व जमा पक्ष का योग समान आने पर यह माना जाता है कि खाते गणितीय रूप से शुद्ध हैं।
प्रश्न 2.
तलपट बनाने की कौन-सी विधियाँ हैं? नाम बताइये।
उत्तर-
तलपट बनाने की तीन विधियाँ हैं
  • योग विधि
  • शेष विधि
  • योग एवं शेष विधि
प्रश्न 3.
उचन्ती खाते का अर्थ बताइये।
उत्तर-
जब तलपट के दोनों पक्षों का योग काफी प्रयास के बाद भी समान नहीं आता है तो उसके अन्तर की राशि जिस खाते में लिखी जाती है उसे उचन्ती खाता कहते हैं।
प्रश्न 4.
तलपट के नाम पक्ष का योग Rs 10,000 तथा जमा पक्ष का योग Rs 8,700 है, उचन्ती खाता बनाइये।
उत्तर-
Suspense A/c
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 5 तलपट एवं अशुद्धियों का सुधार 4
प्रश्न 5.
तलपट को प्रभावित न करने वाली अशुद्धियों के नाम बताइये।।
उत्तर-
  • भूल की अशुद्धि
  • हिसाब की अशुद्धि
  • सैद्धान्तिक अशुद्धि
  • क्षतिपूरक अशुद्धि।
प्रश्न 6.
तलपट को प्रभावित करने वाली कोई दो अशुद्धियों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
उदाहरण-
  • क्रय बही के पृष्ठ का योग Rs 6,300 था जिसे अगले पृष्ठ पर Rs 3,600 लिखा गया।
  • देवेश को Rs 4,000 का माल बेचा इसकी खतौनी देदेश के खाते में तो हो गयी लेकिन विक्रय खाते में नहीं हो पाई।
प्रश्न 7.
क्या तलपट का मिलान इस बात का अकाट्य प्रमाण है कि लेखे गणितीय रूप से शुद्ध हैं ?
उत्तर-
नहीं, क्योंकि तलपट के मिल जाने पर भी ऐसी त्रुटियाँ बनी रहती हैं जो तलपट के मिलान को प्रभावित नहीं करती हैं।
प्रश्न 8.
तलपट बनाने से पूर्व पता लगा कि सुरभि से Rs 250 प्राप्त हुए थे, उसके खाते के नाम पक्ष में लिख दिया। सुधार कीजिए।
उत्तर-
Surbhi’s A/c
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 5 तलपट एवं अशुद्धियों का सुधार 8
प्रश्न 9.
तलपट बनाने के पश्चात् ज्ञात हुआ कि इकबाल से Rs 1,500 का माल खरीदा था, जिसे क्रय खाते में Rs 500 तथा इकबाल के खाते में Rs 1,050 लिख दिया। सुथार की प्रविष्टि कीजिए।
उत्तर-
सुधार प्रविष्टि
Purchase A/c Dr. 1,000
To Iqbal’s A/c 450
To Suspense A/C 550
(Being under posted in purchase account and Iqbal’s account, now rectified)
प्रश्न 10.
क्षतिपूरक अशुद्धि का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
उदाहरण-गणेश को Rs 5,000 चुकाये पर उसके खाते में Rs 500 से खतौनी की तथा सुरेश को Rs 500 चुकाये पर उसके खाते के Rs 5,000 से नाम किया।
प्रश्न 11.
सैद्धान्तिक अशुद्धि का अर्थ बताइये।
उत्तर-
लेखांकन के सिद्धान्तों के लागू न करने के कारण होने वाली अशुद्धि सैद्धान्तिक अशुद्धि कहलाती है।
प्रश्न 12.
पक्ष के आधार पर अशुद्धियों के प्रकार बताइये।
उत्तर-
पक्ष के आधार पर अशुद्धियाँ दो प्रकार की होती हैं-
  • एक पक्षीय अशुद्धियाँ,
  • द्वि-पक्षीय अशुद्धियाँ ।
प्रश्न 13.
डेबिट शेष वाले दो वास्तविक खातों के नाम बताइये।
उत्तर-
  • मशीनरी खाता,
  • फर्नीचर खाता ।
प्रश्न 14.
क्रय वापसी बही का योग Rs 4,000 है, इसे क्रय वापसी के खाते के नाम पक्ष में Rs 400 से खता दिया। इस अशुद्धि से तलपट में अन्तर कितनी राशि से आयेगा तथा किस पक्ष को योग कम आयेगा?
उत्तर-
इस अशुद्धि से तलपट में 4,000 + 400 = Rs 4,400 से अन्तर आयेगा तथा जमा पक्ष का योग कम आयेगा।

RBSE Class 11 Accountancy Chapter 5 लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
तलपट किसे कहते हैं? उसकी तीन विशेषताएँ बताइये।
उत्तर-
तलपट (Trial Balance) तलपट खाताबही के विभिन्न खातों के नाम तथा जमा योगों या खातों के शेषों की वह सूची है जो एक निश्चित तिथि पर खाताबही की गणितीय शुद्धता ज्ञात करने के उद्देश्य से बनायी जाती हैं। इसके दोनों पक्षों के योग के मिल जाने से यह प्रमाणित हो जाता है कि खतौनी ठीक प्रकार से की गयी है तथा अंकगणित सम्बन्धी कोई अशुद्धि नहीं हुई है। तलपट की तीन प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
  • तलपट एक सूची या विवरण पत्र है।
  • इसे खाताबही तथा रोकड़ बही की सहायता से बनाया जाता है।
  • यह प्रारम्भिक लेखों की सहायता से खाताबही में की गई खतौनी की गणितीय शुद्धता की जाँच करता है।
प्रश्न 2.
तलपट बनाने के उद्देश्य संक्षेप में समझाइये।
उत्तर-
तलपट बनाने के उद्देश्य (Objects of Trial Balance)- तलपट बनाने के उद्देश्य निम्नलिखित हैं
  • खातों की गणितीय शुद्धता की जाँच (Checking of Mathematical Accuracy of Accounts)तलपट के नाम व जमा पक्ष का योग समान होने पर यह मान लिया जाता है कि सभी व्यवहारों का दोहरा लेखा हो चुका है तथा खाते गणितीय रूप से
  • खाताबही का सारांश (Summary of Ledger) खाताबही में सभी खातों के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाती है। लेकिन तलपट में खातों के शेष दिये होने से प्रत्येक खाते के बारे में वर्तमान स्थिति की जानकारी हो जाती है।
  • अन्तिम खाते बनाने का आधार (Base of Preparing Final Accounts) तलपट अन्तिम खाते बनाने का आधार है क्योंकि इसी की सहायता से वर्ष के अन्त में व्यवसाय के लाभ-हानि खाते तथा आर्थिक चिट्ठा तैयार किये जाते हैं।
प्रश्न 3.
तलपट बनाने की योग विधि व शेष विथि को समझाइये।
उत्तर-
(i) योग विधि द्वारा तलपट बनाना (Preparing Trial Balance by Total Method)-इस विधि से तलपट तैयार करने के लिए सभी खातों का नाम तलपट में लिखा जाता है। खाताबही में खुले प्रत्येक खाते के दोनों पक्षों का योग अलग-अलग कर लिया जाता है। इसके बाद तलपट में जिस खाते का नाम लिखा जाता है उससे सम्बन्धित ऋणी (Debit) पक्ष की धनराशि के योग को तलपट के ऋणी (Debit) धनराशि के खाने में तथा धनी (Credit) पक्ष के योग को तलपट के धनी (Credit) धनराशि के खाने में लिखते हैं। इस प्रकार एक-एक करके सभी खातों के दोनों पक्षों के योगों को तलपट में लिखा जाता है । अन्त में ‘खातों के नाम वाले खाने में योग लिखकर तलपट के ऋणी एवं धनी धनराशि वाले खानों का अलग-अलग योग कर लिया जाता है। धनराशि के दोनों खानों का योग यदि समान होता है तो यह मान लिया जाता है कि खाताबही (Ledger) में गणित सम्बन्धी कोई अशुद्धि नहीं है।
(ii) शेष विधि द्वारा तलपट तैयार करना (Preparing Trial Balance by Balance Method)-इस विधि द्वारा तलपट बनाने के लिए सबसे पहले खाताबही में खुले प्रत्येक खाते का शेष निकाला जाता है। इसके लिए प्रत्येक खाते के दोनों पक्षों का अलग-अलग योग करके जिस पक्ष का योग अधिक होता है उसमें से जिस पक्ष का योग कम होता है उसे घटाकर शेष निकाला जाता है। इस प्रकार निकला शेष अधिक योग वाले पक्ष का माना जाता है। जैसे—माना कि किसी खाते का ऋणी (Debit) पक्ष का योग अधिक है तथा धनी (Credit) पक्ष का योग कम है तो निकला हुआ शेष ऋणी शेष (Debit Balance) माना जायेगा । इस प्रकार शेष निकालने के बाद तलपट में खाते का नाम लिखकर उसे खाते से सम्बन्धित शेष ऋणी है तो तलपट के ऋणी धनराशि वाले खाने में लिखते हैं और यदि शेष धनी है तो तलपट में धनी धनराशि वाले खाने में लिखते हैं। इस प्रकार सभी खातों का शेष लिखने के पश्चात् ‘खातों के नाम वाले खाने में योग लिखकर धनराशि के दोनों खानों का अलग-अलग योग कर लिया जाता है। यह योग यदि समान होता है तो यह माना जाता है कि खातों में गणित सम्बन्धी अशुद्धि नहीं है।
प्रश्न 4.
तलपट बनाते समय होने वाली अशुद्धियों का पता आप किस प्रकार लगायेंगे ?
उत्तर-
तलपट बनाते समय होने वाली अशुद्धियों का पता लगाने के लिए निम्नलिखित उपाय किये जाते हैं
  • प्रारम्भिक लेखे की अशुद्धियों का पता लगाना-
    (a) सहायक बहियों के योग को पुनः लगाना तथा यह सुनिश्चित करना कि अगले पृष्ठ पर योग ले जाने में त्रुटि तो नहीं हुई है।
    (b) रोकड़ बही के सभी पृष्ठों के शेष को पुनः मिलाना तथा अगले पृष्ठों पर ले जायी गयी राशि सही है यह सुनिश्चित करना।
    (c). यह सुनिश्चित करना कि सभी प्रारम्भिक लेखे लेखांकन सिद्धान्तों व नियमों के अनुसार किए गए हैं तथा उनमें भूल व सिद्धान्त की कोई अशुद्धि नहीं है।
  • खाता वही से सम्बन्थित अशुद्धियों का पता लगाना-
    (a) यह सुनिश्चित करना कि नये वर्ष में पिछले वर्ष के शेष सही ले जाये गये हैं।
    (b) यह सुनिश्चित करना कि सभी खातों के शेष सही निकाले गये हैं तथा Balance c/f व Balance b/f करने में कोई गलती नहीं की गई है।
    (c) यह सुनिश्चित करना कि प्रारम्भिक लेखा बहियों में सभी खातों की खतौनी नियमानुसार कर दी गयी है।
    (d) यह सुनिश्चित करना कि सभी खातों तथा रोकड़ बही के रोकड़ एवं बैंक कॉलम के शेष तलपट में लिख दिये गये हैं।
  • तलपट से सम्बन्धित अशुद्धियों का पता लगाना
    (a) यह सुनिश्चित करना कि तलपट के अन्तर की राशि का कोई खाता लिखने से तो नहीं छूट गया है।
    (b) किसी खाते का शेष तलपट में दो बार तो नहीं लिख दिया गया है यह देखना ।।
    (c) पक्ष बदलने से अन्तर की राशि दो गुनी हो जाती है अतः अन्तर की राशि में 2 का भाग देकर यह देख लेना चाहिए कि कोई खाता गलत पक्ष में तो नहीं लिख दिया गया है।
    (d) यदि फिर भी त्रुटि का पता न चले तो अन्तर की राशि में 9 का भाग देकर देखना चाहिए क्योंकि यदि अन्तर की राशि में 9 का भाग पूरा-पूरा चला जाए तो यह आशंका रहती है कि अंकों के उलटफेर की अशुद्धि हुई है। जैसे-363 के स्थान पर 336 लिखा जाना या 245 के स्थान पर 542 लिखा जाना या 500 के स्थान पर 50 लिखा जाना : दि इन सभी के अन्तर की राशि 9 से विभाजित है।
    (e) यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि सभी देनदारों व लेनदारों के खाते सूची में शामिल कर लिए गये हैं तथा सूची का योग सही है।
प्रश्न 5.
एक पक्षीय व द्वि-पक्षीय अशुद्धि के दो-दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
एक पक्षीय अशुद्धि के उदाहरण
  • कमीशन प्राप्त हुआ Rs 1,500 पर कमीशन खाते में खतौनी नहीं की गयी ।
  • ब्याज का भुगतान किया Rs 300 पर ब्याज खाते में खतौनी नहीं की गयी।
द्वि-पक्षीय अशुद्धि के उदाहरण
  • गणेश को माले बेचा Rs 3,000 पर इस व्यवहार का लेखा क्रय बही में कर दिया।
  • रामलाल से माल खरीदा Rs 20,000 पर इस व्यवहार का लेखा विक्रय बही में कर दिया।
प्रश्न 6.
निम्नलिखित खातों के शेष के आधार पर नाम व जमा को ध्यान में रखते हुये एक तालिका बनाइये।
उत्तर-
रोकड़ खाता, क्रय वापसी खाता, पूँजी खाता, आहरण खाता, क्रय खाती, विक्रय खता, देनदार का खाता, लेनदार का खाता, मशीनरी खाता, वेतन खाता, भवन खाता, बैंक ऋण खाती, विक्रय वापसी खाता, विनियोग खाता, बट्टा प्राप्य खाता, प्रारम्भिक रहतिया खाता, हंसा को ऋण खाती, अग्नि से माल नष्ट खाता ।
खातों का नाम नाम/जमा
रोकड़ खाता नाम
क्रय वापसी खाता जमा
पूँजी खाता। जमा
आहरणे खाता नाम
क्रय खाता नाम
विक्रय खाता जमा
देनदार खाता नाम
लेनदार खाता जमा
मशीनरी खाता नाम
वेतन खाता नाम
भवन खाता नाम
बैंक ऋण खाता जमा
विक्रय वापसी खाता नाम
विनियोग खाता नाम
बट्टा प्राप्य खाता जमा
प्रारम्भिक रहतिया खाता नाम
हंसा को ऋण खाता नाम
अग्नि से माल नष्ट खाता नाम
प्रश्न 7.
तलपट को प्रभावित नहीं करने वाली अशुद्धियों को संक्षेप में समझाइये।
उत्तर-
तलपट को प्रभावित न करने वाली अशुद्धियाँ निम्नलिखित हैं
  • भूल की अशुद्धियाँ (Errors of Omission)-ये अशुद्धियाँ व्यवहार का प्रारम्भिक लेखा करने से भूल जाने अथवा खाताबही में खतौनी करने से भूल जाने के कारण होती हैं।
  • हिसाब की अशुद्धियाँ (Errors of Commission) ये अशुद्धियाँ व्यवहार की गलत राशि लिखने या गलत खाते में लेकिन सही पक्ष में लेखा करने के कारण होती है। ये दो प्रकार की होती हैं
    (a) व्यवहार की खतौनी गलत एवं समान राशि से करना ।।
    (b) अन्य खाते के सही पक्ष में सही-राशि से खतौनी करना।
  • सैद्धान्तिक अशुद्धियाँ (Errors of principle) लेखांकन के सिद्धान्तों को लागू न करने वाली अशुद्धि सैद्धान्तिक अशुद्धि कहलाती है।
  • क्षतिपूरक अशुद्धियाँ (Compensatory Errors) जब एक अशुद्धि का प्रभाव दूसरी अशुद्धि से स्वतः समाप्त हो जाता है तो ऐसी अशुद्धि क्षतिपूरक अशुद्धि कहलाती है।
प्रश्न 8.
तलपट को प्रभावित करने वाली कोई चार अशुद्धियों को उदाहरण द्वारा समझाइये।
उत्तर-
  • सहायक पुस्तकों का योग लगाने में या अगले पृष्ठ पर ले जाने में अशुद्धि ।
    उदाहरण- क्रय बही का योग Rs 6,100 के स्थान पर अगले पृष्ठ पर Rs 1,600 ले जाया गया।
  • रोकड़ बही में विपरीत प्रविष्टि पूर्ण न होना।
    उदाहरण- बैंक में Rs 5,000 जमा किये, जिसका लेखा रोकड़ के कॉलम में हो गया लेकिन बैंक के कॉलम में नहीं हुआ।
  • व्यवहार के दोनों पक्षों में से एक पक्ष में गलत राशि लिखना।
    उदाहरण- सुरेन्द्र को Rs 5,000 भुगतान किया लेकिन रोकड़ खाते में Rs 500 से खतौनी कर दी गयी ।
  • तलपट में एक खाते का शेष दो बार लिखना।
    उदाहरण- तलपट में विक्रय खाते का योग Rs 3,000 दो बार लिख दिया गया।
प्रश्न 9.
योग विधि से बनने वाले तलपट तथा शेष विधि से बनने वाले तलपट में क्या अन्तर है ?
उत्तर-
योग विधि से बनने वाले तथा शेष विधि से बनने वाले तलपट में अन्तर
योग विधि से बनने वाला तलपट शेष विधि से बनने वाला तलपट
यह सभी खातों के दोनों पक्षों के योग से बनाया जाता है। इसमें सभी खातों के शेषों की सूची बनाई जाती है।
इसमें दोनों पक्षों के समान योग वाले खातों को भी लिखा जाता है। इसमें शून्य शेष वाले खातों को नहीं लिखा जाता है।
इसमें खाते के दोनों पक्षों का अन्तर नहीं निकाला जाता है। इसमें खाते के दोनों पक्षों का योग करके तथा अधिक योग वाले पक्ष में से कम योग वाले पक्ष को घटाकर शेष निकाला जाता है ।
इससे अन्तिम खाते बनाने से पूर्व खातों के शेषों की गणना करनी पड़ती है। इसमें अलग से खातों के शेष निकालने की आवश्यकता नहीं होती है।
प्रश्न 10.
कारण सहित बताइये कि निम्न में से कौन-सी अशुद्धि तलपट को प्रभावित करेगी या प्रभावित नहीं करेगी ?
(A) श्याम से खरीदा माल Rs 2,800 का लेखा विक्रय बही में Rs 2,000 से कर दिया।
(B) रामलाल से प्राप्त 1,200 की खतौनी मोहनलाल के खाते में नाम कर दी।
(C) निजी उपयोग के लिए खरीदे फर्नीचर को फर्नीचर खाते में नाम किया Rs 4,300 ।
(D) रोकड़ बही केमा पक्ष से स्टेशनरी खाते की खतौनी करना भूल गये Rs 700।।
उत्तर-
(A) श्याम से खरीदे माल का लेखा क्रय बही में होना चाहिये जबकि उसे विक्रय बही में लिख दिया । अतः तलपट 2,800 + 2,000 = Rs 4,800 से प्रभावित होगा ।
(B) रामलाल से प्राप्त राशि को रामलाल के खाते के जमा पक्ष में लिखने के स्थान पर मोहनलाल के खाते के नाम पक्ष में लिख दिया अतः तलपट दो गुनी (1,200 + 1,200) = Rs 2,400 रकम से प्रभावित होगा।
(C) निजी उपयोग के लिए खरीदे गये फर्नीचर का लेखा आहरण खाते के नाम पक्ष में होना चाहिए था लेकिन फर्नीचर खाते के नाम पक्ष में कर दिया। इससे तलपट प्रभावित नहीं होगा। यह सैद्धान्तिक अशुद्धि है।
(D) स्टेशनरी खाते की खतौनी न होने से Rs 700 का अन्तर आ जायेगा । अतः तलपट प्रभावित होगा।
प्रश्न 11.
तलपट बनाने के पूर्व निम्नलिखित अशुद्धियों का पता लगा । आवश्यक सुधार कीजिये
  1. विक्रय बद्दी का योग Rs 2,200 से कम लगा।
  2. मशीन पर लगाया मूल्य ह्रास Rs 1,400 मूल्य हास खाते में Rs 400 से लिखा ।
  3. कविता को चुकाये Rs 3,200 उसके खाते में लिखना भूल गये ।
उत्तर-
1. विक्रय बही का योग कम लगने से विक्रय खाते के जमा पक्ष में Rs 2,200 कम खताये गये हैं। अतः अशुद्धि सुधार के लिए विक्रय खाते के जमा पक्ष में Rs 2,200 लिखेंगे।
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 5 तलपट एवं अशुद्धियों का सुधार 11
2. मूल्य हास का लेखा 1,400 – 400 = Rs 1,000 से कम हुआ है अतः अब करना होगा।
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 5 तलपट एवं अशुद्धियों का सुधार 11.1
3. कविता को चुकाये Rs 3,200 को उसके खाते में लेखा किया जायेगा ।
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 5 तलपट एवं अशुद्धियों का सुधार 11.2
प्रश्न 12.
तलपट बनाने के बाद निम्नलिखित अशुद्धियों का पता लगा। सुधार की प्रविष्टियाँ दीजिये तथा उचन्ती खाता बनाइये।
  1. विक्रय वापसी वही का योग अगले पृष्ठ पर ले जाते समय Rs 6,500 के स्थान पर Rs 5,600 ले जाया गया।
  2. दिव्या का पुराना फर्नीचर Rs 1,250 में बेचा जिसका लेखा विक्रय बही में कर दिया।
  3. रोकड़ बही के नाम पक्ष के बड़े खाते का योग Rs 200 अधिक लगा दिया।
उत्तर-
In the Books of …….
Journal Entries (Rectification Entries)
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 5 तलपट एवं अशुद्धियों का सुधार 12
प्रश्न 13.
तलपट बनाने के बाद निम्नलिखित अशुद्धियों का पता लगा। सुथार की प्रविष्टिय दीजिये।
  1. विशाल से माल खरीदा Rs 3,000 जिसका लेखा विक्रय बही में कर दिया।
  2. ऋषभ को लौटाये माल Rs 1,500 का लेखा विक्रय वापसी बही में किया।
  3. कीर्तिका को माल बेचा Rs 2,600 का लेखा क्रय वापसी पुस्तक में किया ।
  4. प्रियंका से फर्नीचर खरीदा Rs 1,200 का लेखा क्रय बही में कर दिया।
उत्तर-
In the Books of …….
Journal Entries (Rectification Entries)
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 5 तलपट एवं अशुद्धियों का सुधार 13
प्रश्न 14.
तलपट बनाने से पूर्व लेखापाल को निम्न अशुद्धियों का पता लगा । इन अशुद्धियों को सीधे खातों में सुधार कीजिये
  1. मोहन से प्राप्त Rs 200 उसके खाते में नहीं लिखे गये।
  2. प्राप्त कमीशन Rs 120 को कमीशन खाते में Rs 420 से खताया गया ।
  3. क्रय वापसी पुस्तक का योग Rs 2,111 आगे ले गये और Rs 21 से लिखा गया ।
उत्तर-
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 5 तलपट एवं अशुद्धियों का सुधार 14
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 5 तलपट एवं अशुद्धियों का सुधार 14.1
प्रश्न 15.
तलपट बनाने के बाद ज्ञात हुई निम्नलिखित अशुद्धियों को सुधारने के लिए लिये आवश्यक जर्नल प्रविष्टियाँ दीजिये।
  1. उधार विक्रय के Rs 531 को विक्रय बही में Rs 351 से लिख दिया।
  2. विकास से प्राप्त Rs 320 का चैक बैंक ने अप्रतिष्ठित करके लौटा दिया । इसे विकास के बजाय बट्टा खाता में खता दियो ।
  3. Rs 15,400 में कम्प्यूटर बेचा जिसे विक्रय बही में लिख दिया गया।
उत्तर-
In the Books of ………….
Journal Entries (Rectification Entries)
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 5 तलपट एवं अशुद्धियों का सुधार 15

RBSE Class 11 Accountancy Chapter 5 निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
तलपट का मिलान न होने पर अशुद्धियों का पता लगाने के लिए आप कौन-कौन से कदम उठायेंगे ?
उतर-
तलपट का मिलान न होने पर अशुद्धियों का पता लगाना
यदि तलपट का मिलान नहीं हो रहा है तो निम्नलिखित तीन स्तरों पर अशुद्धियों की सम्भावना रहती है-
(i) प्रारम्भिक लेखे की अशुद्धियाँ ।
(ii) खाताबही से सम्बन्धित अशुद्धियाँ
(iii) तलपट से सम्बन्धित अशुद्धियाँ ।
हम इन तीनों प्रकार की अशुद्धियों का पता लगाने के लिए निम्नलिखित कदम उठायेंगे-
(i) प्रारम्भिक लेखे की अशुद्धियों का पता लगाना
(a) सहायक बहियों के योग को पुन: लगाना तथा यह सुनिश्चित करना कि अगले पृष्ठ पर योग ले जाने में त्रुटि तो नहीं हुई है।
(b) रोकड़ बही के सभी पृष्ठों के शेष को पुनः मिलाना तथा अगले पृष्ठों पर ले जायी गयी राशि सही है यह सुनिश्चित करना ।
(c) यह सुनिश्चित करना कि सभी प्रारम्भिक लेखे लेखांकन सिद्धान्तों व नियमों के अनुसार ही किये गये हैं तथा उनमें भूल व सिद्धान्त की कोई अशुद्धि नहीं है।
(ii) खाताबही से सम्बन्धित अशुद्धियों का पता लगाना
(a) यह सुनिश्चित करना कि नये वर्ष में पिछले वर्ष के शेष सही ले जाये गये हैं।
(b) यह सुनिश्चित करना कि सभी खातों के शेष सही निकाले गये हैं तथा Balance c/d व Balance b/d करने में कोई गलती नहीं की गई है।
(c) यह सुनिश्चित करना कि प्रारम्भिक लेखा बहियों में सभी खातों की खतौनी नियमानुसार कर दी गयी है।
(d) यह सुनिश्चित करना कि सभी खातों तथा रोकड़ बही के रोकड़ एवं बैंक कॉलम के शेष तलपट में लिख दिये गये हैं।
(iii) तलपट से सम्बन्धित अशुद्धियों का पता लगाना
(a) यह सुनिश्चित करना कि तलपट के अन्तर की राशि का कोई खाता लिखने से तो नहीं छूट गया है।
(b) किसी खाते का शेष तलपट में दो बार तो नहीं लिख दिया है यह देखना।
(c) पक्ष बदलने से अन्तर की राशि दो गुनी हो जाती है। अतः अन्तर की राशि में 2 का भाग देकर यह देख लेना चाहिए कि कोई खाता गलत पक्ष में तो नहीं लिख दिया गया है।
(d) यदि फिर भी त्रुटि न मिले तो अन्तर की राशि में 9 का भाग देकर देखना चाहिए क्योंकि यदि अन्तर की राशि में 9 का भाग पूरा-पूरा चला जाए तो यह आशंका रहती है कि अंकों के उलटफेर की अशुद्धि हुई है। जैसे-363 के स्थान पर 336 लिखा जाना,245 के स्थान पर 542 लिखा जाना,500 के स्थान पर 50 लिखा जाना आदि इन सभी के अन्तर की राशि 9 से विभाजित है।
(e) यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि सभी देनदारों व लेनदारों के खाते सूची में शामिल कर लिए गये हैं तथा सूची का योग सही है।
प्रश्न 2.
लेखांकन में अशुद्धि से क्या तात्पर्य है? वे कौन-कौन-सी अशुद्धिय हैं जो तलपट के मिलान को प्रभावित करती हैं ?
उत्तर-
लेखांकन में अशुद्धि का अर्थ (Meaning of Errors in Accounting)
भूलवश दोहरा लेखा प्रणाली के विभिन्न नियमों व सिद्धान्तों का पालन न करके लेखा पुस्तकों में लेखा करने पर होने वाली त्रुटि ही लेखांकन में अशुद्धि कहलाती है। अशुद्धियाँ दो प्रकार की होती हैं
  1. तलपट को प्रभावित न करने वाली अशुसिय, तथा
  2. तलपट को प्रभावित करने वाली अशुद्धियाँ ।
तलपट को प्रभावित करने वाली अशुद्धियाँ (Errors Affecting Trial Balance)
ये ऐसी अशुद्धियाँ होती हैं जिनके होने पर तलपट के दोनों पक्षों का योग समान नहीं आता है। ऐसी अशुद्धियों को दो भागों में बाँटा जा सकता है
(i) लेखा करने में अशुद्धियाँ (Errors in Accounting) इन्हें पुनः दो भागों में बाँटा जा सकता है
(a) प्रारम्भिक लेखा पुस्तकों में अशुद्धियाँ (Errors in the books of Original Entries)
  • सहायक पुस्तकों का योग लगाने में अथवा योग को अगले पृष्ठ पर ले जाने में अशुद्धि ।।
  • रोकड़ बही के रोकड़ व बैंक कॉलम का शेष निकालने या शेष को अगले पृष्ठ पर ले जाने में अशुद्धि ।
  • रोकड़ बही में विपरीत प्रविष्टि पूर्ण न होने की अशुद्धि ।
(b) खाताबही से सम्बन्धित अशुद्धियाँ (Errors Relating to Ledger)
  • किसी व्यवहार के किसी एक पक्ष की खतौनी न होना।
  • व्यवहार के किसी एक पक्ष में गलत राशि लिखना।।
  • व्यवहार के एक पक्ष में सही लेकिन दूसरे पक्ष के गलत पक्ष में खतौनी करना ।
  • किसी एक पक्ष में भूलवश दो बार खतौनी करना ।
  • खाते का प्रारम्भिक शेष न लिखना, शेष निकालने में त्रुटि करना या अगले पृष्ठ पर शेष ले जाने में गलती करना ।
(ii) तलपट से सम्बन्धित अशुद्धिय (Errors Relating to Trial Balance)
(a) किसी खाते का शेष तलपट में लिखने से छूट जाना।
(b) किसी एक खाते का शेष दो बार लिख देना।
(c) किसी खाते का शेष तलपट के गलत पक्ष में लिखना।
(d) तलपट में किसी खाते की गलत राशि लिखना ।
(e) गलती से अन्तिम स्टॉक को तलपट में लिखा जाना ।
प्रश्न 3.
तलपट को प्रभावित नहीं करने वाली अशुद्धियों को उदाहरण सहित समझाइये।
उत्तर-
तलपट को प्रभावित न करने वाली अशुद्धिय (Errors Not Affecting Trial Balance)
सामान्यतया तलपट के दोनों पक्षों का योग समान आ जाने पर हम यह मान लेते हैं कि खाते में कोई त्रुटि नहीं है व खाते गणितीय रूप से शुद्ध हैं लेकिन यह लेख की शुद्धता का अकाट्य प्रमाण नहीं है क्योंकि ऐसी अशुद्धियाँ जो तलपट के मिलान को प्रभावित नहीं करती हैं उनके रह जाने पर भी तलपट का मिलान हो जाता है। ऐसी अशुद्धियाँ निम्नलिखित हैं—
(i) भूल की अशुद्धियाँ (Erors of Omission)-
भूल की अशुद्धियाँ निम्नलिखित दो प्रकार की होती है
(a) व्यवहार का प्रारम्भिक लेखा न करना –
उदाहरण – देवप्रकाश को माल बेचा Rs 5,000 लेकिन इसका लेखा नहीं किया। इसका प्रभाव यह होगा कि देव प्रकाश के नाम पक्ष में Rs 5,000 नहीं लिखे तथा विक्रय खावे के जमा पक्ष में Rs 5,000 नहीं लिखे गये। अतः तलपट के दोनों पक्षों में Rs 5,000 कम पहुँचे लेकिन तलपट फिर भी मिल जायेगा।
(b) खातावही में खतौनी न करना –
यदि किसी व्यवहार का प्रारम्भिक लेखा तो ठीक प्रकार से हो गया है लेकिन खतौनी करना भूल गये हैं तो त्रुटि बनी रहेगी।
उदाहरण – दयाराम से माल खरीदा Rs 2,000 लेकिन खाताबही में लेखा नहीं हुआ। इसका प्रभाव यह होगा कि क्रय खाते के नाम पक्ष तथा दयाराम के खाते का जमा पक्ष दो-दो हजार से कम रहेंगे लेकिन इस त्रुटि के बने रहने पर भी तलपट मिल जायेगा।
(ii) हिसाब की अशुलियाँ (Errors of Commission)-
हिसाब की अशुद्धियाँ निम्नलिखित दो प्रकार की होती हैं-
(a) व्यवहार की खतौनी गलत लेकिन समान राशि से करना
उदाहरण – दीपक से माल खरीदा Rs 10,000 लेकिन खतौनी Rs 1,000 से की। इसका प्रभाव यह हुआ कि दोनों पक्षों में Rs 9,000 से कम खतौनी हुई। लेकिन इस त्रुटि के रहते हुए भी तलपट मिल जायेगा।
(b) अन्य खाते के सही पक्ष में सही राशि से खतौनी-
उदाहरण देवेश से Rs 1500 प्राप्त हुए लेकिन देवेन्द्र के खाते में जमा कर दिये । इस प्रविष्टि में देवेश के स्थान पर देवेन्द्र का खाती जमा हो गया लेकिन इस अशुद्धि के रहते हुए ही तलपट मिल जायेगा ।
(iii) सैद्धान्तिक अशुद्धियाँ (Erors of Principles)-
कभी-कभी बहीखाता के मूल सिद्धान्तों एवं नियमों का ज्ञान न होने के कारण गलत खाते में खतौनी हो जाती है अर्थात् पूँजीगत तथा आयगत व्ययों का लेखा करते समय लेखांकन के सिद्धान्तों का ध्यान नहीं रखा जाता है और गलत खाते में प्रविष्टि कर दी जाती है, तो इस प्रकार की अशुद्धियाँ सैद्धान्तिक अशुद्धियाँ कहलाती हैं। जैसे—मशीन की मरम्मत का व्यय मशीन खाते में डेबिट करना,मशीन खरीदने पर क्रय खाते को डेबिट करना आदि।
(iv) ऋतिपूरक अशुद्धियाँ (Compensatory Errors)-
कभी-कभी प्रारम्भिक लेखे की एक अशुद्धि का प्रभाव दूसरी अशुद्धि से स्वतः समाप्त हो जाता है, ऐसी अशुद्धियों को क्षतिपूरक अशुद्धियाँ कहते हैं। इनसे तलपट तो मिल जाता है लेकिन अशुद्धियाँ बनी रह जाती हैं। जैसे-सुरेश से माल खरीदने पर क्रय खाता Rs 1,000 के स्थान पर Rs 100 से डेबिट किया तथा दिनेश से माल खरीदने पर क्रय खाता Rs 100 के स्थान पर Rs 1,000 से डेबिट कर दिया। इस प्रकार पहली अशुद्धि दूसरी से समाप्त हो गई।
प्रश्न 4.
अशुद्धि सुधार की प्रथम व द्वितीय अवस्था को विस्तार से समझाइये।।
उत्तर-
अशुद्धि सुधार की अवस्थाएँ (Stages of Rectification of Errors)
लेखा पुस्तकों में हुई अशुद्धियों के सुधार की निम्नलिखित तीन अवस्थाएँ हैं
तलपट बनाने से पूर्व अशुद्धियों का सुधार।।
तलपट बनाने के पश्चात् लेकिन अन्तिम खाते बनाने से पूर्व अशुद्धियों का सुधार।
अन्तिम खाते बनाने के बाद अशुद्धियों को सुधार।
उपरोक्त में से प्रथम दो अवस्थाओं का विस्तार से वर्णन निम्न प्रकार है
तलपट बनाने से पूर्व अशुद्धियों को सुधार (Rectification of Errors before Preparing Trial Balance)
इस स्थिति में अशुद्धि सुधार के लिए निम्नलिखित विधि अपनाई जाती है
  • सबसे पहले वे खाते बनाये जाते हैं जिनमें अशुद्धि हुई है तथा सुधार करना है।
  • अशुद्धि वाले खाते में सबसे पहले अशुद्धि सुधार की खतौनी करेंगे।
  • अशुद्धि वाले खाते में यदि अधिक राशि लिख दी है तो सुधार के लिए अन्तर की राशि उसी खाते के विपरीत पक्ष में लिखी जायेगी।
  • जब अशुद्धि में खाते का पक्ष बदल जाता है तो सुधार की राशि दोगुनी हो जायेगी।
  • अशुद्धि सुधार करते समय खाते में अशुद्धि का कारण भी लिखा जाता है।
तलपट बनाने के पश्चात् लेकिन अन्तिम खाते बनाने से पूर्व अशुद्धियों का सुधार
(Rectification of Errors after Preparing Trial Balance but before Preparing the final Account)
(A) तलपट को प्रभावित करने वाली अशुद्धियों का सुधार इस प्रकार की अशुद्धियों को सुधार करने के लिए उचन्ती खाते का प्रयोग किया जाता है । इनका सुधार निम्न प्रकार किया जाता है
1. सहायक बही के योग सम्बन्धी अशुद्धि का सुधार
  • यह देखना अशुद्धि से कौन-सा खाता प्रभावित हुआ है तथा उसका नाम शेष है या जमा शेष ।
  • यदि सहायक बही के योग की खतौनी होने से छूट गई है अथवा कम राशि से की गई है अथवा योग कम लग गया है या अगले पृष्ठ पर शेष कम ले जाया गया है तो सुधार के लिए कमी की राशि से डेबिट शेष वाले खाते को डेबिट तथा क्रेडिट शेष वाले खाते को क्रेडिट करेंगे।
  • यदि सहायक बही में अधिक राशि से खतौनी कर दी गई है अथवा योग अधिक लग गया है या अगले पृष्ठ पर अधिक राशि ले जायी गयी है तो सुधार के लिए अतिरिक्त राशि से डेबिट शेष वाले खाते को क्रेडिट तथा क्रेडिट शेष वाले खाते को डेबिट करेंगे।
2. खाते में खतौनी सम्बन्धी अशुद्धि का सुधार
(i) व्यवहार के एक पक्ष की खतौनी न होना या कम राशि से होना–ऐसी स्थिति में सम्बन्धित खाते को कमी की राशि से नाम/जमा किया जाता है तथा दूसरे पक्ष में उचन्ती खाते का उपयोग किया जाता है, जैसे- Rs 2,000 ब्याज का भुगतान किया लेकिन ब्याज खाते में Rs 200 से खतौनी की गई। इसका प्रभाव यह होगा कि ब्याज खाते के नाम पक्ष का योग Rs 1,800 से कम हो जायेगा । अतः इसकी सुधार प्रविष्टि निम्न प्रकार होगी
Interest A/c Dr. 1,800
To Suspense A/C 1,800
(Being amount of interest under posted by Rs 1,800, now rectified)
(ii) सही खाते के गलत पक्ष में खतौनी ऐसी स्थिति में दो गुनी राशि का अन्तर हो जाता है। अतः सुधार प्रविष्टि दो गुनी राशि से की जाती है, जैसे–दीपक को Rs 2,000 चुकाये जिसे उसके खाते में जमा कर दिया । दीपक के खाते को नाम करने के स्थान पर जमा कर दिया अतः Rs 4,000 का अन्तर पड़ गया । अतः इसकी सुधार प्रविष्टि निम्न प्रकार होगी
Deepak’s A/c Dr. 4,000
To Suspense A/C 4,000
(Being deepak’s A/c wrongly credited instead of debit, now rectified)
(iii) गलत खाते के गलत पक्ष में खतौनी-ऐसी स्थिति में यह सोचा जाता है कि सही लेखा क्या होना था ? तथा गलत क्या हो गया ? अब ऐसी प्रविष्टि होगी जिससे गलती का प्रभाव समाप्त हो जाए तथा लेखा भी सही हो जाए। जैसे—प्रदीप से माल खरीदा Rs 3,000 लेकिन देवेश के खाते में Rs 300 जमा नाम कर दिए। इसके सुधार हेतु प्रदीप के खाते को Rs 3,000 से जमा तथा देवेश के खाते को भी गलती के प्रभाव को समाप्त करने के लिए Rs 300 से जमा करना होगा। अतः निम्न प्रकार प्रविष्टि होगी
Suspense A/C Dr. 3,300
To Pradeep’s A/c 3,000
To Devesh’s A/c . 300
(Being devesh’s account was wrongly debited instead of Pradeep’s account, now rectified)
B. तलपट को प्रभावित न करने वाली अशुद्धियों को सुधार
1. किसी व्यवहार को लेखा करने से छूट जाना—ऐसी स्थिति में जिस व्यवहार का लेखा नहीं किया गया है उसका लेखा कर देंगे, जैसे—गणेश से मशीनरी खरीदी Rs 2,000 लेकिन लेखा करना भूल गये । इसका लेखा निम्न प्रकार कर दिया जायेगा-
Machinery A/c Dr. 2,000
To Ganesh’s A/c
(Being machinery purchased from Ganesh but not entered, now rectified)
2. किसी व्यवहार का लेखा दोनों पक्षों में गलत पर समान राशि से करना-ऐसी स्थिति में गलती को सुधारते हुए लेखा किया जाता है, जैसे दीपिका से माल खरीदा Rs 5,200 जिसका लेखा Rs 2,500 से कर दिया। स्पष्ट है कि (5,200 – 2,500) = Rs 2,700 से कम लेखा हुआ है अतः सुधार प्रविष्टि निम्न प्रकार बनेगी
Purchase A/C Dr. 2,700
To Deepika’s A/c 2,700
(Being goods purchased by Deepika short entered by Rs 2,700 now corrected) ।
3. गलत खाते के सही पक्ष में सही राशि से लेखा-ऐसी स्थिति में जिस खाते में गलत लेखा कर दिया गया है उसके विपरीत पक्ष में भी उतनी ही रकम से लेखा किया जाता है तथा जिस खाते में लेखा होना चाहिए था उसमें कर दिया जाता है, जैसे—किरोड़ीमल को Rs 9,300 चुकाये इसकी खतौनी मीना लाल के खाते में कर दी। इसकी सुधार प्रविष्टि निम्न प्रकार होगी- Kirorimal’s Dr. 9,300
To Meenalal’s A/C 9,300
(Being amount paid to Kirorimal wrongly debited to Meenalal, now corrected)
4. गलत सहायक बही में लेखा करना इस स्थिति में अशुद्धि का सुधार करने के लिए सही प्रविष्टि की जायेगी तथा गलत प्रविष्टि को विपरीत प्रविष्टि करके समाप्त (Undo) कर दिया जायेगा, जैसे—प्रभात से Rs 2,000 का माल खरीदा जिसका लेखा विक्रय बही में कर दिया । प्रभात का खाता जमा करने के स्थान पर नाम कर दिया है। अतः अब उसे 2000 + 2,000 = Rs 4,000 से जमा करना होगा तथा विक्रय खाते को नाम करना होगा तथा क्रय खाता भी नाम होगा। इसे निम्न प्रकार समझा जा सकता है
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 5 तलपट एवं अशुद्धियों का सुधार 4a

RBSE Class 11 Accountancy Chapter 5 आंकिक प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित खातों की सहायता से योग विधि और शेष विधि से तलपट बनाइये।
(Prepare Trial Balance with the help of following accounts by Total method and Balancing Method)
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 5 तलपट एवं अशुद्धियों का सुधार 1b
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 5 तलपट एवं अशुद्धियों का सुधार 1b.1
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 5 तलपट एवं अशुद्धियों का सुधार 1b.2
उत्तर:
1. Total Method-
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 5 तलपट एवं अशुद्धियों का सुधार 1b.3
2.Balance Method-
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 5 तलपट एवं अशुद्धियों का सुधार 1b.4
प्रश्न 2.
मोहम्मद यूनुस की पुस्तकों से लिये गये निम्नलिखित खातों के शेष से 31 मार्च 2017 को तलपट तैयार कीजिये।
(From the following account balances taken from the books of Mohammed Yunus, prepare Trial Balance as on 31st March, 2017)
रहतिया (Stock) (1,4,2015)- Rs 30,000, क्रय (Purchase)- Rs 57,500, विक्रय (Sales)- Rs 80,500, पूँजी । (Capital)- Rs 13,000, लेनदार (Creditors)- Rs 19,295, विक्रय वापसी (Sales Returns)- Rs 3,000, बैंक ऋण (Bank (Loan)- Rs 7,500, प्राप्य बिल (B/R)- Rs 1,000, क्रय वापसी (Purchase Return)- Rs 2,500, देनदार (Debitors)- Rs 12,500, मशीनरी (Machinery)- Rs 5,500, भवन (Building)- Rs 4,950, किराया चुकाया (Rent Paid)- Rs 1,500, बैंक ऋण पर ब्याज चुकाया (Paid on Person Bank Loan)- Rs 500, कमीशन प्राप्त हुआ (Commission Received)- Rs 1,855, डूबत ऋण (Bad Debts)- Rs 200, बैंक शेष (Bank Balance)- Rs 2,250, रोकड़ शेष (Cash Balance)- Rs 4,500, फर्नीचर (Furniture)- Rs 1,500, हिरण (Drawings)- Rs 1,000, देय बिल (B/P)- Rs 1,250, रहतिया (Stock) (31,3.2017)- Rs 20,000।
उत्तर:
Trial Balance (as on 31st March 2017)
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 5 तलपट एवं अशुद्धियों का सुधार 2b
अन्तिम रहतिया (Closing stock)- Rs 20,000
प्रश्न 3.
निम्नलिखित सूचनाओं से रमेशकुमार की पुस्तकों में 31 दिसम्बर, 2016 को तलपट तैयार कीजिये
(Prepare Trial Balance in the books of Ramesh Kumar as on 31st December, 2016 from the following informations)
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 5 तलपट एवं अशुद्धियों का सुधार 3b
उत्तर:
Trial Balance (as on 31st March 2016)
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 5 तलपट एवं अशुद्धियों का सुधार 3b.1
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 5 तलपट एवं अशुद्धियों का सुधार 3b.2
अन्तिम रहतिया (Closing Stock)- Rs 35,000
प्रश्न 4.
एक अनुभवहीन लेखापाल तेजपाल द्वारा बनाये गये अशुद्ध तलपट को सही बनाइये। (31 मार्च, 2017)
(Rectify the following Trial Balance prepared by an unexperienced accountant Tejpal) (31 Mar., 2017)
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 5 तलपट एवं अशुद्धियों का सुधार 4b
उत्तर:
Trial Balance (as on 31st March 2017)
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 5 तलपट एवं अशुद्धियों का सुधार 4b.1
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 5 तलपट एवं अशुद्धियों का सुधार 4b.2
प्रश्न 5.
तलपट बनाने के बाद ज्ञात हुई निम्न अशुद्धियों के सुधार की प्रविष्टिय दीजिये तथा उचन्ती खाता बनाइये।
Give rectifying entries for the following errors detected after the trial balance was prepared and prepare Suspense Account)
1. क्रय बही का योग Rs 2,000 से कम लगाया गया (The purchase book was undercast by Rs 2,000)
2. माँगीलाल से प्राप्त व्याज Rs 1,500 मोतीलाल के खाते में Rs 500 से जमा कर दिया
(Interest received from Mangilal Rs 1,500 was credited to the account of Motilal as Rs 500)
3. रामकिशन से Rs 3,000 का नकद क्रय का लेखा क्रय बही में कर दिया
(Cash purchase of Rs 3,000 from Ramkishan was entered in Purchase Book)
4. रोकड़ बही के प्राप्ति पक्ष का बट्टा स्तम्भ Rs 200 से कम जोड़ा गया
(The total of discount received column of Cash Book was undercat by Rs 200)
5. माल क्रय पर चुकाया गाड़ी भाड़ा Rs 600 को पुस्तकों में दर्ज नहीं किया गया
(Freight Rs 600 paid on purchase of goods was not recorded in the books)
6. स्टेशनरी के चुकाये Rs 700 से स्टेशनरी खाते के जमा पक्ष में लिख दिया।
(Paid for stationery Rs 700 was credited to stationery account)
उत्तर:
In the Books of ……..
Journal Entries (Rectifying Entries)
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 5 तलपट एवं अशुद्धियों का सुधार 5b
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 5 तलपट एवं अशुद्धियों का सुधार 5b.1
प्रश्न 6.
प्रश्न सं. 5 में यह मानते हुए अशुद्धि का सुधार कीजिये कि अशुद्धियों का पता तलपट बनाने के पूर्व हुआ है।
(Rectify the errors given in Q. No. 5 assuming that these errors were detected before trial balance. was prepared)
उत्तर:
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 5 तलपट एवं अशुद्धियों का सुधार 6b
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 5 तलपट एवं अशुद्धियों का सुधार 6b.1
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 5 तलपट एवं अशुद्धियों का सुधार 6b.2
प्रश्न 7.
एक तलपट के अन्तर को उचन्ती खाते में हस्तान्तरण करने के बाद निम्न अशुद्धियों का पता चला। इनके सुधार की प्रविष्टियाँ दीजिये तथा उचन्ती खाता बनाइये।
(Following errors were detected after transferring the difference of trial balance in suspense account)
1. पुरानी मशीन को Rs 2,500 में बेचा जिसका लेखा विक्रय पुस्तक में कर दिया गया
(An old machine was sold for Rs 2,500 which was entered in Sales Book)
2. क्रय वापसी बही का योग Rs 1,400 के स्थान पर Rs 4,100 आगे ले जाया गया
(The total of Purchase Return Book was carried forward as Rs 4,100 instead of Rs 1,400)
3. नरेश कोर 800 का भुगतान किया, पर इसे महेश के खाते में जमा कर दिया गया
(Paid Rs 800 to Naresh was credited to Mahesh’s account)
4. विक्रय बही का योग Rs 2,000 से अधिक लगा (The Sales Book was overcast by Rs 2,000)
5. मशीन पर लगाया गया मूल्य ह्रास Rs 1,000 मूल्य हासे खाते में Rs 1,100 लिखा
(Depreciation on machinery Rs 1,000 was written as Rs 1,100 in depreciation Account)
6. रोकड़ बही के नाम पक्ष से सुनील के Rs 500 की खतौनी उसके व्यक्तिगत खाते में नहीं की
(From the debit side of Cash Book, Sunil’s amount Rs 500 was not entered in pessonal account)
उत्तर:
Journal Proper
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 5 तलपट एवं अशुद्धियों का सुधार 7b
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 5 तलपट एवं अशुद्धियों का सुधार 7b.1
प्रश्न 8.
तलपट बनाने के पूर्व निम्न अशुद्धियों का पता लगाकर आवश्यक सुथार कीजिये।
(Following errors were detected before preparing trial balance, make necessary rectification)
1. पुष्पा को उधार विक्रय Rs 1,800 उसके व्यक्तिगत खाते में Rs 800 ही खताये गये
(A credit sales of Pushpa worth Rs 1,800 was postged as Rs 800 only in her personal account)
2. दीपक के खाते के नाम शेष के Rs 1,300 आगे ले जाते समय जमा पक्ष में Rs 130 लिख दिये।
(The debit balance of Rs 1,300 from Deepak’s account was carried forward as Rs 130 on credit side)
3. रोकड़ बही के जमा पक्ष के बड़े कॉलम में Rs 150 लिखना भूल गये ।
(An ommission of Rs 150 was made in discount column of credit side of Cash Book)
4. फर्नीचर क्रय पर चुकाया गया गाड़ी भाड़ा Rs 500 गाड़ी भाड़ा खाते में नाम कर दिया
(Carriage paid on purchase of furniture Rs 500 was debited to carriage account)
5. प्रवीण को Rs 2,700 का माल लौटाया, जिसका लेखा विक्रय बही में कर दिया।
(Goods returned to Praveen Rs 2,700 was passed through Sales Book)
Solution :
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 5 तलपट एवं अशुद्धियों का सुधार 8b
RBSE Solutions for Class 11 Accountancy Chapter 5 तलपट एवं अशुद्धियों का सुधार 8b.1

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